जयपुर। प्रदेश के कई हिस्सों में शीतलहर और पाले से फसलों में 15 से लेकर 40 प्रतिशत तक नुकसान सामने आया है। प्रतापगढ़ जिले में इस वर्ष रबी सीजन में एक लाख 31 हजार 456 हैक्टेयर में बुवाई की गई थी।
इसमें से 10 हजार हैक्टेयर में मक्का, चना, सरसों, टमाटर, बैंगन, जीरा, मटर और पपीता की फसल में नुकसान हुआ है। दौसा जिले के नांगल राजावतान क्षेत्र में फसलों को करीब 60 फीसदी तक नुकसान पहुंचा है।
सरसों की फसल में भी नुकसान होने से किसानों की चिन्ता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार जिले में इस वर्ष करीब 15 हजार हैक्टेयर भूमि पर सरसों और 1700 हैक्टेयर भूमि पर सब्जी की फसलों का किसानों ने उत्पादन किया गया।
इन दिनों पड़ रही कड़ाके की सर्दी के चलते सब्जी की फसल टमाटर, मिर्ची, बैंगन आदि झुलस गई है। जानकारी के अनुसार पाले से रेतीली और असिंचित भूमि में फसलों में अधिक नुकसान हुआ है।
चित्तौड़गढ़़ जिले में तापमान में गिरावट के साथ ही फसलों को पाले ने चपेट में ले लिया है। मुख्य रूप से टमाटर, मिर्च, बैंगन आदि सब्जियों, पीपीता, मटर, चना, अलसी, सरसों, जीरा, धनिया व अफीम की फसल को नुकसान की आशंका बढ गई है। अरहर और गन्ने की फसल को भी पाले से नुकसान की आशंका है।
हाड़ौती में 40 हजार हैक्टेयर में नुकसान!
हाड़ौती में यूरिया संकट की मार झेल रहे किसानों को अब शीतलहर ने मारा डाला है। मोटे तौर पर हाड़ौती में करीब 40 हजार हैक्टेयर फसलें पाले से प्रभावित हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान झालावाड़ जिले में माना जा रहा है। पाले के कारण धनिये, टमाटर, बैंगन, चने और सरसों की फसल में हुआ है।
प्रारम्भिक अनुमान के अनुसार बारां जिले में धनिये के अलावा सब्जियों में 15 से 20 फीसदी नुकसान का अनुमान है। झालावाड़ जिले में धनिये की फसल में करीब 40 फीसदी तक नुकसान माना जा रहा है। जिले में धनिया, सरसों और चने में काफी नुकसान हुआ है। कोटा जिले के बूदाढ़ीत व रामगंजमंडी क्षेत्र में पाले से फसलों में नुकसान हुआ है।
उद्यानिकी फसलें में धनिये, टमाटर, बैंगन की फसल में नुकसान हुआ है। सभी जगहों से नुकसान का प्रारम्भिक आकलन कर रिपोर्ट भेजने को कहा है। पी.के. गुप्ता संयुक्त निदेशक उद्यान विभाग
पाला गिरने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। जिन खेतों में सिंचाई कर रखी थी वहां,नहर,नदी और तलाब किनारे,पहाडिय़ों की तलहटी में स्थित खेतों में असर कम पड़ा है। पाले की वजह से खराबे का आंकलन कर मुख्यालय रिपोर्ट भेजी जा रही है।
डॉ देवेन्द्रप्रतापसिंह राठौड़, कृषि अधिकारी (उद्यान)





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