दौसा ग्रामीण. राज्य में बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्टर्ड करीब 50 हजार निजी परीक्षकों में से अधिकांश को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को राजस्थान निजी परीक्षक संघ की ओर से 6 सूत्री मांगों को लेकर दौसा विधायक मुरारीलाल मीना को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। इस पर उन्होंने अपेक्षित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
ज्ञापन में बताया कि निजी परीक्षक प्रायोगिक कार्य एवं उत्तर पुस्तिकाओं की जांच से ग्रीष्मकालीन के दौरान 15 से 20 हजार रुपए आय हो जाती थी, लेकिन अजमेर बोर्ड की ओर से उन्हें हटाने से खासी परेशानी झेलनी पड रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में बोर्ड की 12वीं के सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक परीक्षा कार्य तृतीय एवं द्वितीय श्रेणी के सरकारी शिक्षकों से कराया गया है। जबकि बोर्ड के नियमानुसार प्रथम श्रेणी अध्यापक ही यह कार्य कर सकता है। इसके अलावा गत सरकार की ओर से आयोजित भर्ती किए गए फस्र्ट ग्रेड अध्यापकों को बिना अनुभव ही प्रायोगिक परीक्षा में नियुक्ति दे दी गई। जबकि कम से कम एक वर्ष का अनुभव होना चाहिए। पहले जिले से बाहर परीक्षकों को नियुक्त किया जाता था। इससे गोपनीयता बनी रहती थी, लेकिन अब जिलेे के अध्यापक को ही लगा दिया जाता है। इससे माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की गोपनीयता भंग हो रही है। जबकि राज्य में करीब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के करीब 50 हजार रजिस्टर्ड परीक्षक हंै। ऐसे में उचित कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में दुलीचन्द महावर, राजेन्द्र मीना, राजेश डिगवाल, मनीष डिगवाल, चेतराम बैरवा, मुकेश शर्मा, नारायण महावर, राजाराम मीना, मनीष कुमार वर्मा एवं शैलेन्द्र शर्मा आदि शामिल थे।
शाला समंक प्रपत्र भिजवाने के निर्देश
दौसा ग्रामीण. जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मुख्यालय की ओर से शाला समंक प्रपत्र जमा नहीं करने वाले राजकीय एवं गैर राजकीय विद्यालयों के संस्था प्रधानों को नोटिस का प्रति उत्तर भिजवाने के लिए पत्र जारी किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मुख्यालय दौसा ने बताया कि शाला समंक प्रपत्र जमा कराने के लिए ब्लॉक में श्िविर का आयोजन किया गया था। लेकिन इसके बाद भी 26 एवं 31 दिसम्बर 2018 तक जमा कराने के लिए निर्देशित करने के बावजूद शाला समंक प्रपत्र जमा नहीं कराए है। ऐसे में प्रपत्र जमा नहीं कराने वाले विद्यालय तीन दिवस में जमा कराएं।





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