नर्इ दिल्ली। एक तरफ दुनियाभर के लोग नए साल के जश्न में मशगूल हैं वहीं, भारत के आम लोगों को साल के पहले दिन ही एक बड़ा झटका लगा है। एक ताजा अांकड़ों की गणित को समझें तो देश केर नागरिक पर 62 हजार कर्ज का बोझ है। दरअसल ये खुलासा वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट से हुआ है। वित्त मंत्रालय ने जो सरकार को कर्ज प्रबंधन की एक तिमाही रिपोर्ट सौंपी है उसमे ये बात सामने आई है कि देश की 134 करोड़ की आबादी पर प्रति व्यक्ति हजारों का कर्ज आ गया है। दरअसल इस रिपोर्ट के अनुसार बीते साल के सितंबर माह के आखिर तक सरकार पर कर्ज बढ़कर 82 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस हिसाब से देखें तो देश के 134 करोड़ नागरिकों में से प्रत्येक नागरिक पर करीब 62 हजार रुपये का कर्ज आ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार बीते साल जून माह के आखिर तक सरकार पर 79.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था। इस आंकड़े के हिसाब से तो प्रति नागरिक पर 59 हजार 552 रुपये का कर्ज था। यानी सरकार के सर पर बढ़े कर्ज के बोझ को देखें तो महज तीन महीनों में आप पर 2,448 रुपये का कर्ज बढ़ गया है और सरकार पर 2.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज केवल तीन महीनों में बढ़ा है।
क्या है कर्ज में इतनी बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण
वित्त मंत्रालय ने जो रिपोर्ट सौंपी है इस हिसाब से इतनी भारी मात्रा में कर्ज बढ़ने की कर्इ वजहें सामने आई हैं। कर्ज में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होना। इतना ही नहीं इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट भी इसके लिए जिम्मेदार है। वहीं अमेरिकी फेड-भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दरों में जो देनदारी पर इजाफा किया गया है उससे भी सरकार के कर्ज में इजाफा हुआ है।
इस कर्ज में आगे भी बढ़ोतरी के आसार
आंकड़ों के हिसाब से गणना करें तो अभी सरकार या आप पर लगा यह कर्ज अभी और भी बढ़ सकता है। दरअसल, अमरीकी आर्थिक नीतियों की निगरानी करने वाले फेड रिजर्व ने हाल ही में अपनी देनदारी पर ब्याज की दरों में इजाफा किया था। इसके साथ ही फेड ने यह भी संकेत दिए थे कि आने वाले दिनों में ब्याज दरों में वह एक बार फिर से इजाफा कर सकता है। एेसे में फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में इजाफे से भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर देखने को मिल सकता है। हालांकि देश में रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती करके इस कर्ज को रिकवर करने में मदद भी कर सकता है।
महंगार्इ दर में हो सकता है इजाफा
अगर इसी तरह से कर्ज बढ़ता गया तो देश में इसका असर महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है। आरबीआई का भी मानना है कि इस नए साल में देश में महंगाई का खतरा बढ़ रहा है। गौरतलब है कि बीते माह आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा था, "जहां वित्त वर्ष 2018-19 के दूसरी छमाही में महंगाई 2.7 से 3.2 फीसदी हो सकती है वहीं वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही के दौरान यह 3.8 से 4.2 फीसदी हो सकती है।" रिज़र्व बैंक की तरफ से ये बयान मौद्रिक समीक्षा नीति के बाद आया था। अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर देश में महंगाई के रूप में होगा और आपकी जेब का बोझ बढ़ सकता है।
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