सादुलपुर. गांव लंबोर छोटी में बीमारी के कारण भेड़ों की मौत का सिलसिला जारी है। गांव के ही मनोज ने बताया कि सोमवार को भेड़ के सात छोटे बच्चों की मौत हो गई। वहीं ग्रामीणों ने रोष जताया कि चिकित्सकों को सूचना देने पर कंपाउडरों को भेजते हैं, स्वयं आकर पशु का उपचार नहीं कर रहे हैं। 15 दिनों से बीमारी के कारण दर्जनों भेड़ों की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि नौ जनवरी को गांव के पशुपालक हरिसिंह एवं धर्मपाल की दो दर्जन से भी अधिक भेड़ों की मौत हुई थी तथा पशुपालक हरिसिंह के सात मेमनों की सोमवार को मौत हो गई। अचानक पशुओं की हो रही मौत के कारण पशुपालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता देवेन्द्र गोदारा ने बताया कि गांव में भेड़ों की हो रही मौत की शिकायत करने के बाद भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई हो रही है तथा ना ही अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब दिया जा रहा है। गांव के मुकेश राठौड़, वीरेन्द्र सिंह, श्रवण सिंह, सुरेन्द्र सिंह, कालूराम, विक्रमसिंह, राजूसिंह, रामानंद, चुन्नीलाल आदि ने बताया कि भेड़ों के मुंह पर फुंसी होने एवं मुंह पर सूजन आने के बाद तड़प कर भेड़ मर जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि पशुपालक भेड़ों को पालकर अपना जीवन बसर कर रहे थे। लेकिन पन्द्रह दिनों से भेड़ों के मरने के सिलसिले के कारण पशुपालकों के घरों में पीडि़त परिवार के सदस्य खाना भी नहीं खा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने रोष जताया कि समय रहते विभाग की ओर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो, मजबूरन आंदोल करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि चिकित्सकों की ओर से उपचार करना दूर की बात, बल्कि संतोषजनक जवाब देना भी जरूरी नहीं समझते।
इनका कहना है
मेरे पास सौ भेड़ें हैं। जिनमें 15-16 भेड़ों की मौत नौ जनवरी को हो गई थी। जिसके बाद बड़ी एक-दो भेड़ों सहित सात मेमनों की सोमवार को हो गई। विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
हरिसिंह, पशु पालक लंबोर छोटी, सादुलपुर
शिकायत पर जांच करवाकर उचित कार्रवाई करेंगे। हालांकि ग्रामीणों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।
सुभाष भडिय़ा, एसडीएम, सादुलपुर





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