Breaking News
recent

घाना नहीं अब चूरू में देखें 79 प्रजातियों के हजारों जलीय पक्षी

चूरू

शेखावाटी के लोगों को अब पक्षियों की प्रजातियां देखने के लिए केवलादेव स्थित घाना पक्षी अभयारण्य जाने की जरूरत नहीं है। चूंकि जिले में देशी व विदेशी प्रवासी पक्षियों की १५० से अधिक प्रजातियां शीतकालीन प्रवास पर मौजूद हैं। इसमें करीब 70 प्रजातियां गैर जलीय हैं जो पानी में नहीं रहती। पानी में रहने वाली 79 प्रजातियां देखी गई हैं। जिले के करीब 18 तालाबों पर 11 हजार से अधिक पक्षियां मिली हैं। जिले में इन दिनों ईराक, ईरान, मंगोलिया, लदख, अफगानिस्तान, यूरोपियन रेंज, साइबेरिया व हिमालय के आस-पास से पक्षियों का समूह बड़ी सख्या में आए हैं। उक्त पक्षी जिले के विभिन्न तालाबों व गैनाणियों में डेरा डाले हुए हैं।


चूरू शहर के आस-पास करीब 35 प्रजातियों की सात हजार से अधिक पक्षी गैनाणियों व तालाबों पर विचरण कर रही हैं। इस बार जिले में 18 तालाबों पर आने वाले पक्षियों की गणना की गई है। यह सर्वे 10 जनवरी को पूरा हो गया। इस साल पक्षियों का नजारा देखने लायक है। सबसे अधिक पक्षी चूरू की गाजसर गैनाणी व तारानगर में आपणी योजना के प्लांट पर देखे गए हैं। वन विभाग के एसीएफ दिलीप सिंह ने बताया कि पक्षी विशेषज्ञ डा. केसी सोनी, जोधपुर के वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट राकेश कुमार, पक्षी एक्सपर्ट सूरतसिंह पूनिया, रेंजर नरपतसिंह, शक्ति सिंह, वनपाल गजेन्द्रसिंह तंवर, मुकेश कुमार, आनंदसिंह ने तालाबों पर पक्षियों की गणना की।


ग्रेटर फ्लेमिंगों बना आकर्षण का केन्द्र


एसीएफ सिंह ने बताया कि दोनों स्थानों पर सात हजार से अधिक पक्षी देखे गए। विशेषज्ञ सोनी ने बताया कि 60 प्रजातियां विदेशी हैं। डा. सोनी ने बताया कि कामन टील, लिटिल ग्रेब, रफ, ब्लैक वींग स्टिल्ट, रेड वेटलड लेपविंग, कॉमन मूरहेन, फ्लेमिंगो, कामन कूट, ग्रेहेरोन, ह्वाइट टेल्ड लेपविंग, नार्थन शोवलर, कॉमन पोचार्ड, रूडी शानलेक, ब्लैग आईब्रिज, ग्रोट कारमोनेंट, लिटिस स्टिल्ड, ब्लैक टेल्ड जोडविट, गे प्लोर, कॉमने के्रन, कुरजां प्रमुख प्रजातियां हैं। फ्लेमिंगों चूरू में करीब 12 साल बाद देखा गया। साइबेरियन पक्षी भी बड़ी संख्या में आए हैं। आने वाले कुछ समय में चूरू में पक्षियों की संख्या और बढ़ेगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। छापर के बाद चूरू में सबसे अधिक पक्षियां देखी गई। गणना टीम में शामिल पक्षी विशेषज्ञ गजेन्द्रसिंह तंवर ने बताया पक्षी यहां प्रजनन के लिए नहीं बल्कि चारे के लिए आते हैं। चूंकि संबंधित देशों में शीतकाल के दौरान बर्फ काफी तेजी से पड़ती है और वहीं चारे नहीं मिल पाता है। इसलिए उक्त पक्षी विदेशों से माइग्रेट कर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में आते हैं।


इन तालाबों पर की गणना


चूरू में गाजसर गैनाणी, गाजसर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, गाजसर बीड़, छापर में गांधी सागर तालाब, चाड़वास तालाब, गोपालपुरा तालाब, जसवंतगढ़ तालाब, जसवंगढ़ वन क्षेत्र तालाब, तारानगर में आपणी योजना स्टोरेज डैम, सरदाशर, रतनगढ़ व राजगढ़ में शहर के आस पास गैनाणियों पर पक्षियों की गणना की गई।

 

 

''विभाग की ओर से मध्य शीतकालीन जलीय पक्षियों की गणना करवाई गई है। यह गणना पूरी हो चुकी है। जल्द ही विभाग को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। 79 प्रजातियों की 11 हजार से अधिक जलीय पक्षियां गणना में पायी गई हैं। ''
बीएल शर्मा, डीएफओ, चूरू



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.