अलवर. वो दिन गए जब सेना में भर्ती को सबसे आसान माना जाता था। अब सेना भर्ती में अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से बड़ी प्रतिस्पद्र्धा है। जिसकी पुष्टि इंदिरा गांधी स्टेडियम अलवर में हो रही सेना भर्ती के अभ्यर्थियों की संख्या और अनुमानित चयनितों से हो रही है।
यहां पर अलवर, दौसा व सवाईमाधोपुर तीन जिलों के युवाओं की सेना भर्ती हो रही है। जिसमें 50 हजार पंजीकृत अभ्यर्थियों में से करीब 40 हजार अभ्यर्थियों के उपस्थित होने का अनुमान है। पूरी प्रक्रिया के बाद 40 हजार में से केवल 350 से 400 युवाओं का चयन हो सकेगा। सेना भर्ती के पदों की संख्या तो निश्चित नहीं है। लेकिन पिछली भर्ती के चयनितों के आंकड़े के आधार पर भर्ती अधिकारी इतना ही बता रहे हैं कि करीब 350 से 400 युवाओं इस भती से चयन हो सकेगा।
सबसे कठिन सेना की दौड़, 90 प्रतिशत फेल
सेना में सबसे कठिन दौड़ हैं। जिसमें करीब 90 प्रतिशत अभ्यर्थी दौड़ में ही फेल हो जाते हैं। पिछली भर्तियों में भी दौड़ में उत्तीर्ण होने वालों का आंकड़ा करीब दस प्रतिशत ही रहा है। इसके बाद कुछ अभ्यर्थी शारीरिक नाप तोल तो कुछ मेडिकल में असफल रह जाते हैं।
मैरिट में एक चौथाई ही पास हो पा रहे
सबसे आखिरी में लिखित परीक्षा होती है। इसके बाद दौड़, शारीरिक दक्षता परीक्षा के अंक मिलाकर मैरिट जारी होती है। जिसमें करीब एक चौथाई अभ्यर्थी ही पास हो पाते हैं। तीन जिलों की सेना भर्ती में माना जा रहा है कि करीब 1800 से 2000 युवा लिखित परीक्षा तक पहुंचेंगे। जिसमें से आखिरी मैरिट में करीब 400 युवाओं को नौकरी मिलने का अवसर मिल पाता है।
अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इतने सफल
पटवारी, रेलवे, शिक्षक जैसी अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी करीब-करीब इतनी ही प्रतिस्पद्र्धा रहती है। वहां भी करीब 200 अभ्यर्थियों पर एक तो कभी 100 अभ्यर्थियों पर एक का चयन होता है। जबकि सेना भती में भी यही औसत निकल कर आ रहा हैं। जिसके कारण यह कहा जा सकता है कि अब सेना की नौकरी भी आसान नहीं है। दूसरी परीक्षाओं में तो फिर भी केवल लिखित परीक्षा ही महत्वपूर्ण होती है। बल्कि सेना में तो शारीरिक व लिखित के अलावा मेडिकल का भी बड़ा महत्व होता है।





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