चूरू.
फसली ऋण में धांधली की शिकायत झूठी निकली। हालांकि दी चूरू सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड प्रबंधन ने ऋण माफी योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों की जांच के लिए टीम गठित कर दी है। जांच होने के बाद ही नई ऋण माफी की फाइनल सूची वेबसाइट पर जारी की जाएगी। टीम को नौ दिन के अंदर रिपोर्ट देनी होगी।
गांव रामसरा ताल निवासी रविन्द्र कुमार के नाम से धांधली की शिकायत की गई थी। शिकायत कर्ता ने लिखा था कि वह ग्राम सेवा समिति सिधमुख का सदस्य है। उसने कोई लोन नहीं लिया था फिर भी उसका ऋण माफ किया गया। मामले की जांच करने पहुंचे दी राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बीकानेर के क्षेत्रीय प्रंधक हंसराज सोनी ने बताया कि सिधमुख सोसायटी में रविन्द्र नाम का कोई व्यक्ति ऋण नहीं लिया था और न ही उसका कोई ऋण माफ हुआ है। रविन्द्र ने पहले लोन लिया था जो 20 अप्रेल 2012 को बंद हो गया। वह ग्राम सेवा समिति रामसराताल का सदस्य है। इसके बाद उसने कोई ऋण नहीं लिया और न ही उसको ऋण माफी का कोई लाभ मिला। शिकायतकर्ता ने जो मोबाइल नंबर दिया था वह हरिसिंह व्यक्ति के नाम का निकला। पूछताछ में रविन्द्र ने किसी प्रकार की शिकायत से मना कर दिया।
वहीं दी चूरू सेंट्रल कोऑपरेटिव सोसायटी के प्रबंध निदेशक शेरसिंह ने बताया कि जिस व्यक्ति के नाम से शिकायत की गई थी वह गलत निकली। हालांकि एहतियात के तौर पर पूरे जिले में ऋण माफी योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों की जांच के लिए नौ अधिकारियों को लगा दिया गया है। अधिकारी १४ जनवरी तक रिपोर्ट देंगे। इसमें यदि कोई ऋण गलत पाया गया तो उसका संशोधन कर फाइनल ऋण माफी सूची वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। ऋण माफी में शामिल सभी ऋणधारकों का सत्यापन करेगी। जिले में भाजपा सरकार की घोषणा के मुताबिक करीब 89 हजार किसानों के 152 करोड़ रुपए माफ हुए थे।





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