सीकर.
अब प्रदेश के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के पांच सरकारी स्कूल गोद लेंने होंगे। इस संबंध में विभाग ने निर्देश जारी कर दिए है। विभाग का तर्क है कई सरकारी स्कूलों को प्रोत्साहित किया जाए तो वह निजी स्कूलों को भी टक्कर दे सकते है। इस लिहाज से विभाग ने यह आदेश जारी किए है। इसके लिए सभी अधिकारियों को 28 जनवरी तक निदेशक माध्यमिक शिक्षा के कार्यालय को सूचना देनी होगी। इसके बाद विभाग टॉप स्कूलों की रैकिंग भी करेगा। गौरतलब है कि विभाग के इन अधिकारियों की ओर से लगातार फील्ड में निरीक्षण भी किए जाते है। ऐसे में वह इन विद्यालयों आसानी से और ज्यादा फोकस कर सकते है। इससे पहले प्रशानिक अधिकारियों को भी विद्यालयों गोद देने की योजना शुरू हुई थी। इसके शुरूआत में तो काफी अच्छे परिणाम आए थे। लेकिन बाद में निदेशालय से मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
परिणाम और नामांकन पर फोकस
शिक्षा विभाग के इस व्यवस्था को शुरू करने के पीछे वजह परिणाम और नामांकन है। मार्च में बोर्ड परीक्षाएं होनी है। ऐसे में विभाग अभी से सरकारी स्कूलों के परिणाम को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का खासा प्रभाव रहता है। ऐसे में वह भामाशाहों के सहयोग से स्कूलों की तस्वीर बदल सकते है।
प्रारंभिक स्कूलों में जल्द शुरू होगी योजना
पहले चरण में यह योजना माध्यमिक स्कूलों के लिए लागू हुई है। अगले चरण में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए यह योजना लागू होगी। योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर भामाशाहों की अगुवाई में भी कमेटी का गठन होना है। इसका मकसद ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को हाईटेक बनाना है।





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