जयपुर. राज्य में अफीम की खेती नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों के लिए पैसों की खेती से कम नहीं है। अफीम की खेती के पट्टे (लाइसेंस) जारी करने से लेकर क्षेत्र का मुखिया बनाने तक के मामले में अधिकारी चांदी कूट रहे हैं। एसीबी अधिकारियों ने खुलासा किया कि नारकोटिक्स अधिकारी अफीम की खेती में किस तरह घालमेल करते हैं। एसीबी के डीजी डॉ. आलोक त्रिपाठी, एडीजी सौरभ श्रीवास्तव, आइजी दिनेश एमएन, एसपी शरद चौधरी, एएसपी ठाकुर चन्द्रशील, निरीक्षक विक्रम सिंह की निगरानी में नारकोटिक्स विभाग के एडिशनल कमिश्नर सहीराम मीणा को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इसके बाद और भी कई बड़े खुलासे हुए हैं।
तीन माह पहले इंस्पेक्टर पकड़ा, फिर भी बेखौफ
एसीबी ने 3 माह पहले विभाग के कोटा में तैनात इंस्पेक्टर और एक संविदाकर्मी को अफीम के पट्टे के मामले में गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के बावजूद डिप्टी कमिश्नर सहीराम बेखौफ रिश्वत वसूल रहा था। दलाल कमलेश का पिता पहले मुखिया था लेकिन इस बार अन्य व्यक्ति को मुखिया बना दिया गया था। इसकी शिकायत कमलेश ने सहीराम को की थी। कोटा में शिकायत पत्र भी बरामद किया है।
सम्पत्ति यह भी
बाबा आरएन गौड़ गृह निर्माण सहकारी समिति लिमिटेड जयपुर के सहीराम मीणा के नाम से 23 भूखंड, बेटे के नाम भी 23 भूखंड, पत्नी प्रेमलता के नाम 42 भूखंड, प्रेमलता के नाम ही 22 दुकानों के आवंटन पत्र, गोपालपुरा गृह निर्माण सहकारी समिति लिमिटेड से प्रेमलता के नाम 4 भूखंड हैं।
कमाई के लिए यों करते हैं घालमेल
- केन्द्र सरकार का नारकोटिक्स विभाग अफीम की खेती के लिए पट्टे जारी करता है
- पुश्तैनी किसानों के पास पट्टे हैं तो समय-समय पर उन्हें पुन: जारी किया जाता है
- नारकोटिक्स विभाग अफीम खरीदते समय प्रत्येक किसान तक नहीं पहुंच सकता, इसके लिए एक क्षेत्र में एक वर्ष के लिए एक मुखिया या लंबरदार बनाते हैं, जिनके जरिए अफीम की खरीद की जाती है।
- कम गुणवत्ता की अफीम होने या काली पडऩे पर भी उनकी सरकारी खरीद करवाकर रिश्वत वसूली जाती है
- अफीम के तौल में हेरा-फे री कराई जाती है
- अफीम निकलने के बाद डोडा-पोस्त को नष्ट कराया जाना चाहिए लेकिन इसकी बजाय मुखिया नारकोटिक्स अधिकारियों की मिलीभगत से तस्करी कराकर उसे अन्य जिलों में या पंजाब में बिकवा देता है
भाषण का मौका भी नहीं देना चाहती थी एसीबी टीम
एसीबी टीम ने आरोपी सहीराम और दलाल कमलेश का मोबाइल सर्विलांस पर रखा तब 25 जनवरी को रिश्वत के एक लाख रुपए देने तय हुए। लेकिन ऐनवक्त पर दलाल नहीं आया। एसीबी टीम ने 25 जनवरी को आरोपी सहीराम मीणा की निगरानी शुरू कर दी थी। बाद में कमलेश द्वारा 26 जनवरी को रिश्वत की राशि देना तय हुआ। एसीबी टीम 26 जनवरी को सुबह आरोपी मीणा के घर निगरानी रखे हुए थी। तभी मीणा की गाड़ी को 2 सब इंस्पेक्टर बाइक से एस्कॉर्ट करते हुए उसके दफ्तर ध्वजारोहण के लिए ले गए। वहां मीणा ने 20 मिनट तक ईमानदारी पर भाषण दिया। हालांकि एसीबी टीम उसे भाषण देने का मौका भी नहीं देना चाहती थी। फिर घर लौटकर मीणा ने दलाल कमलेश से रिश्वत के एक लाख रुपए लिए। तभी एसीबी टीम ने दबिश देकर राशि के साथ उसे पकड़ लिया।
भ्रष्ट पर कार्रवाई कराएं, गुप्त रखेंगे नाम
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के आइजी दिनेश एमएन ने कहा कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए आमजन आगे आएं, एसीबी की मदद करें। शिकायत करने वाले का नाम बिलकुल गोपनीय रखा जाएगा। शिकायतकर्ता के काम, कारोबार पर कोई आंच नहीं आएगी





No comments:
Post a Comment