बालोतरा. अकाल की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आय का जरिया पशुधन है, जिसको पालना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। सुकाळ में चारा खेत में पैदा होने पर मोल खरीदने की जरूरत नहीं रहती। एेेसे में किसान चार-पांच गायें पालता है, लेकिन अब मोल खरीदने की मजबूरी है।
इसमें भी दिनोंदिन चारे के भावों में बढ़ोतरी से परेशानी बढ़ रही है। एक माह पहले सूखे चारे के दाम साढ़े आठ रुपए किलो थे जो अब साढ़े दस रुपए हो गए हैं। एक गाय दस किलो चारा प्रतिदिन खाती है, एेसे में हर दिन सौ-सवा सौ रुपए चारे पर खर्च हो रहे हैं।
पेयजल की कमी के चलते पानी के टैंकर भी डलवाने पड़ रह रहे हैं। किसानों, पशुपालकों को सरकार से उम्मीद है कि राहत देगी, लेकिन अब तक चारा डिपो या पशुशिविर की स्वीकृति नहीं होने से उन्हें निराशा हो रही है।
इस वर्ष कमजोर मानसून से प्रदेश व जिले भर के किसान मेहनत जितने अनाज को तरस गए। एक और बारिश नहीं होने पर खेतों में खड़ी फसलें जल गई। खेतों में अधपकी खड़ी फसल से कुछ मिले चारे को पशुओं को खिलाकर किसानों, पशुपालकों ने दो-तीन माह का समय जैसे-तैसे निकाला। अब स्थिति खराब है।
एक ओर जहां थोड़ा बहुत चारा पशुपालकों के पास था वह खत्म हो गया तो दूसरी ओर बीते एक माह में सूखे चारा के भाव में प्रति किलो दो रुपए की हुई बढ़ोतरी हो गई। इससे किसानों, पशुपालकों की रही सही कमर ही टूट गई।
पेयजल की भी कमी-
कम वर्षा पर तालाब, नाडियो में जमा हुआ छंटाग भर पानी बीतने व सूखे चारा की कीमतों में बढ़ोतरी होने से किसानों व पशुपालकों के लिए एक-एक दिन गुजारना मुश्किल हो रहा है। परेशान किसान हर दिन अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों को चारा-पानी की समस्या से अवगत करवाकर अनुदान दर पर चारा उपलब्ध करवाने व पानी का पुख्ता प्रबंध करवाने की मांग कर रहे हैं। आश्वासन के अलावा कहीं से कुछ भी नहीं मिल रहा है।
गोशाला संचालकों की बढ़ी दिक्कत-
महंगे चारा से गोशाला संचालकों की भी दिक्कतें बढ़ गई है। गोशालाओं का संचालन करना इनके लिए दिन ब दिन मुश्किल हो रहा है। इस पर अब हर कहीं से अनुदान आधार पर चारा उपलब्ध करवाने व पानी का पूरा इंतजाम करने की मांग उठ रही है।
सूखा चारा भी नहीं मिल रहा आसानी से -
सूखा चारा कहीं भी आसानी से नहीं मिल रहा है। इसके भाव भी बहुत ऊंचे हैं। पानी को लेकर पहले से ही परेशान है। इस पर पशुओं को पालना मुश्किल हो रहा है। सरकार शीघ्र अकाल प्रबंधन के कार्य शुरू करे।
- कानाराम सांई, किसान
एक माह में चारे के भाव बढ़े-
एक माह में चारा के भावों में अधिक बढ़ोतरी हुईहै। अनुदान दर पर चारा उपलब्ध नहीं करवाया तो पशुपालक पशुओं को खुला छोड़ेंगे। सरकार अनुदान पर चारा उपलब्ध करवाए। गोशाओं के लिए विशेष इंतजात करें।
- गौतम माली, गोशाला संचालक
जरूरत का आधा चारा खरीद रहे-
दिसम्बर में सूखा चारा 8 से 8.30 रुपए प्रतिकिलो दर से बिक रहा था। अब यह 10 से 10.30 हो गया है। महंगे भाव पर पशुपालक व गोशाला संचालक जरूरत से आधा ही चारा खरीद रहे हैं। इस भाव में भी चारा आसानी से नहीं मिल रहा है। - हस्तीमल जैन, चारा ठेकेदार





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