जयपुर. जलियांवाला बाग की घटना सुनियोजित षड्यंत्र था? क्या वहां पहुंचने वाले लोग निहत्थे थे? वे लोग आंदोलन को लेकर हिंसक हो गए थे। जनरल डायर ने वहां की स्थिति देखी, जहां भड़काऊ भीड़ थी, इसलिए स्थिति को भांपते हुए गोलियां चलाने का आदेश देना पड़ा। ऐसे सवालों के बीच जलियांवाला बाग की घटना जेएलएफ के मंच पर फिर से ज्वलंत हो गई।
स्थिति यह बन गई कि ब्रिटिश लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में कोलोनल इंडिया व ब्रिटिश एम्पायर हिस्ट्री पढ़ाने वाले किम ए वेगनर को विरोध का भी सामना करना पड़ा। किम ने हाल ही 'जलियांवाला बाग' बुक लिखी है। उनका कहना था कि जलियांवाला बाग में एक विद्रोही सेना मौजूद थी। इसलिए जनरल डायर को गोलियां चलाने का आदेश देना पड़ा।
लेखिका और अमृतसर में दुनिया का पहला पार्टिशन म्यूजियम शुरू करने वालीं किश्वर देसाई ने विरोध करते हुए कहा कि वे निहत्थे थे, आम व्यक्ति थे, शांतिप्रिय सत्याग्रह के लिए जुटे थे लेकिन डायर की भूमिका कमतर नहीं की जा सकती। हालांकि, इसके कहीं भी सही आंकड़े नहीं हैं कि वहां कितने लोग मारे गए, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि वह एक सुनियोजित नरसंहार था। यूएस में पूर्व भारतीय एम्बेसेडर और लेखक नवतेज सरना ने कहा कि डायर की भूमिका बड़ी थी, क्योंकि लोग जुटने के कुछ ही मिनटों में गोलियां चला दी गई थीं। तथ्य यह भी कहते हैं कि डायर दो दिन से वहां पेट्रोलिंग कर रहा था।





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