कोटा. पश्चिम मध्य रेलवे में ट्रेक पर ट्रेनों की औसत रफ्तार सबसे ज्यादा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस जोन के कोटा मंडल में हर तीन घंटे में एक ट्रेन रास्ते में अटक जाती है। रेलवे की ओर से वाया कोटा होकर दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए आए दिन प्रयोग किए जा रहे हैं।
टेलगो टे्रन के बाद इस रूट पर टे्रन-18 को भी 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चलाया गया। तकनीकी दृष्टि से इस रूट पर कोई बाधा नहीं होने के बाद भी इस रूट पर कभी ट्रेन के ब्रेक लग जाते हैं। हर रोज कोटा मंडल में मवेशी कहीं भी औसत 8 ट्रेनों को रोक देते हैं। कई बार तो इंजन तक फेल हो जाता है, इस कारण ट्रेन एक घंटे तक भी अटकी रहती है।
1 अप्रेल 2018 से 11 जनवरी 2019 तक कोटा मंडल में मवेशियों ने 1305 से ज्यादा टे्रनों को रास्ते में रोक दिया। हर माह औसत 218 मवेशी ट्रेन से टकरा रहे हैं। रोजाना 7 से 8 मवेशी ट्रेनों से टकराकर मर रहे हैं, इससे ट्रेनों का परिचालन बाधित हो रहे हैं। रेलवे के संरक्षा विभाग की ओर से ट्रेक पर मवेशियों के आने से रोकने के लिए ट्रेक की फेंङ्क्षसग की आवश्यकता की सिफारिश की जाती रही है, लेकिन फेंसिंग की योजना अमल में नहीं लाई जा सकी है।
यहां सबसे ज्यादा अटकती हैं ट्रेनें
कोटा मंडल के रावंठा रोड, अलनिया और दरा ऐसी जगह हैं, जहां सबसे ज्यादा मेवशी ट्रेनों से टकराते हैं। पिछले छह माह में रावंठा रोड में 73, अलनिया में 66 और दरा में 59 बार मवेशी ट्रेन से टकराए। इस कारण टे्रनें रास्ते में खड़ी रहीं। इससे पहले जनवरी 2017 से जून 2018 तक रावंठा रोड पर 135, इंद्रगढ़ में 125, कोटा में 114, लाखेरी में 110, बयाना में 108, सवाईमाधोपुर में 106, आमली में 104 मवेशी रनओवर होकर ट्रेनों के संचालन में बाधा बने।
प्रयास हुए पर सफलता नहीं मिली
रेलवे की ओर से मवेशी रनओवर रोकने के लिए नुक्कड़ नाटक से जरिए ग्रामीणों को जागरूक किया कि वे ट्रेक के पास मवेशी नहीं चराएं। कई जगह ट्रेन के पास की हरियाली को भी उजाड़ा, लेकिन रनओवर की घटनाएं बंद नहीं हुई।
वन्यजीव भी कटकर मर रहे
कोटा मंडल सहित देशभर में मवेशियों के साथ वन्यजीव भी ट्रेक पर कटकर मर रहे हैं। वर्ष 2018 में 58 हाथी और 22 वन्यजीव भी ट्रेन से टकराकर मारे गए। कोटा मंडल में गत 9 जनवरी को यात्री ट्रेन से टकराकर एक पैंथर की मौत हो गई।





No comments:
Post a Comment