भीलवाड़ा.
कड़ाके सर्दी में बच्चों की पीड़ा को प्रशासन ने भले ही नजरअंदाज कर दिया, लेकिन सोमवार शाम मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने महसूस किया। सोमवार शाम भीलवाड़ा आए मानवाधिकार आयोग सदस्य उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश महेशचन्द्र शर्मा ने प्रशासन को छोटे बच्चों की छुट्टी करने के निर्देश दिए। इस पर जिला प्रशासन ने देर शाम हाथोंहाथ पहली से सरकारी व निजी स्कूलों में पांचवी तक के बच्चों की 15 दिन का अवकाश घोषित कर दिया। अवकाश मंगलवार से शुरू होंगे। इसी प्रकार छठी से बारहवीं कक्षा के बच्चों के समय में भी परिवर्तन करते हुए 9.30 बजे कर दिया गया। शिक्षकों को पूर्व निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचना होगा।
शाम को जस्टिस शर्मा ने सर्किट हाउस पहुंचने के बाद कड़ाके की सर्दी को देखते हुए अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) राजेन्द्र कविया से बात की। उन्होंने कहा कि जिले में स्कूलों में अवकाश है या नहीं। कविया ने कहा कि जिले के स्कूलों में अवकाश घोषित नहीं कर रखा है। इस पर जस्टिस शर्मा का कहना था कि कड़ाके की सर्दी में अफसरों के कमरों में हीटर चल रहे और बचाव के लिए लोग गर्म कपड़ों में लिपटे हुए हैं। एेसे में छोटे बच्चे सुबह जल्दी उठकर कड़ाके की सर्दी में स्कूल कैसे जा रहे हैं। उन्होंने जिले में स्कूलों में अवकाश करने के निर्देश दिए। बाद में जिला शिक्षा अधिकारी को सर्किट हाउस बुलाकर अवकाश के आदेश जारी करवाए गए।
पत्रकार वार्ता में जस्टिस शर्मा ने कहा कि अवकाश को लेकर कलक्टर को आदेश दिए हैं कि वे इनमें संशोधन कर सकते हैं। सर्दी कम पड़ जाए तो अवकाश रद्द कर दिया जाए। सर्दी का असर कम नहीं हो तो एक पखवाड़े का समय और आगे बढ़ा दिया जाए।
आदमी बुरा नहीं होता, वक्त बुरा होता है
जस्टिस शर्मा ने जिला कारागार का निरीक्षण किया। वहां बन रहे भोजन को चखा और बंदियों की समस्या सुनी। शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि आदमी बुरा नहीं होता। उसका वक्त बुरा बनाकर जेल पहुंचा देता है। कर्मों को सुधारने की जरूरत है।
सात हजार मामले अब भी लम्बित
जस्टिस शर्मा ने कहा कि उन्होंने अक्टूबर 2018 में आयोग कार्य संभाला था। उस समय करीब 9 हजार शिकायतें आयोग के पास थी। चार माह में दो हजार मामलों का निस्तारण किया। सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस महकमे की थी।





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