- प्रमोद भटनागर
बीएलओ के कार्य के साथ शिक्षा का दायित्व भी
हाइकोर्ट के आदेशों के बाद भी नहीं मिली बीएलओ के कार्य से मुक्ति
राजसमंद/आईडाणा. नाम जोडऩे से लगाकर मतदाता सूचियों का अद्यतन करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लगे अधिकतर शिक्षक दो पाटो में फंसे हुए हैं। ये भारत निर्वाचन विभाग की सबसे महत्वपूर्ण इकाई के रूप में कार्य करने वाली मानव-शक्ति (बीएलओ) है। इसके बावजूद इनकी वेदना पर आला अधिकारी आंखे मुंदे हैं। हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद शिक्षकों को बीएलओ के कार्य में लगा रखा है। ऐसे में बीएलओ पर निर्वाचन विभाग व शिक्षा विभाग की दोहरी मार पड़ रही है।
शैक्षणिक कार्यों में लगे शिक्षकों को भारत निर्वाचन विभाग द्वारा आदेश निकालकर बीएलओ का कार्य संपादित करने के लिए नियुक्तकिया जाता है। इससे शिक्षक, शिक्षार्थी व शिक्षा हित में अपना योगदान नहीं दे पाता। निर्वाचन विभाग के अत्यधिक दबाव के चलते, बीएलओ को मानसिक, शारीरिक, आर्थिक व व्यक्तिगत पीड़ा से भी गुजरना पड़ता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी शिक्षक मुक्त नहीं
हाईकोर्ट ने शिक्षकों को बीएलओ के कार्य से मुक्त रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद निर्वाचन विभाग ने शिक्षण कार्य में लगे गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयाध्यापकों को भी बीएलओ का कार्य सौंप दिया। वहीं, मुख्य विषय अध्यापक जैसे भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी को सुपरवाइजर पद की जिम्मेदारी सौंपी रखी है। इससे बच्चों की पढ़ाई खराब होने के साथ संबंधित विषय अध्यापकों के परीक्षा परिणाम भी प्रभावित हो रहे हैं। इसके चलते शिक्षकों पर शिक्षा विभाग की कार्यवाही का डर भी हमेशा बना रहता है। दूसरी ओर चुनाव कार्य में कोई कमी रह जाने पर निर्वाचन विभाग की कार्यवाही का डर भी सताता है।
ये है बीएलओ का कार्य
बीएलओ को संबंधित मतदान केन्द्र के क्षेत्र में 18 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके, पुरुष, महिला व थर्ड जेंडर के नाम जोडऩे, संशोधन करने, विलोपन, स्थानांतरण, दिव्यांग मतदाताओं को चिन्हित करने तथा उनकी दिव्यांगता के प्रकार का निर्धारण करने, वरिष्ठ मतदाताओं, बूथ के मोजेस मतदाताओं को सूचीबद्ध करने एवं प्रत्येक मतदाता की आयु, जन्म तिथि, माता /पिता /पति का नाम, मकान नंबर, एपिक नंबर, मतदाता क्रमांक संख्या, मोबाइल नंबर सहित, नवीन फोटो चित्र आदि सूचनाओं को संग्रहित करके, संबंधित सुपरवाइजर व उपखंड अधिकारी कार्यालय में अविलंब भेजना होता है! वहीं, बूथ लेवल अधिकारी को मतदाताओं के क्षेत्र से बाहर रहने की सूचना देने, मतदाताओं में वार्ड तथा राजस्व गांव का नजरी-नक्शा तैयार करने, उन्हें पोलिंग बूथ तक लाने वाहन- रूट- चार्ट उपलब्ध करवान, मतदान दिवस के दिन पोलिंग-पार्टी की सभी जरूरतों की व्यवस्था सहित अन्य कार्य करने होते हैं।
पीएल भी पूरी नहीं
ग्रीष्मावकास में विधानसभा चुनाव के लिए 36 कार्य दिवस तक कार्य किया, जिसकी नियमानुसार 12 पीएल होनी चाहिए। जबकि, निर्वाचन विभाग की ओर से पांच पीएल ही देने के आदेश दिए गए।
कैलाश स्वर्णकार, बीएलओ आमेट
प्रभावित होता है शिक्षण कार्य
बीएलओ के कार्यभार के लिए पंचायत सहायकों का सहयोग लेना चाहिए। पूर्व में पंचायती राज एवं राजस्व विभाग के कर्मचारी ही बीएलओ का कार्य करते थे। वर्तमान व्यवस्था से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
राजेन्द्रसिंह चुण्ड़ावत, शिक्षक नेता, आमेट
शिक्षकों को रखें दूर
निर्वाचन विभाग को बीएलओ के कार्य से शिक्षको को दूर रखना चाहिए। वहीं एक हजार से अधिक मतदाता वाले भाग संख्या में दो बूथ बनाने चाहिए। निर्वाचन का कार्य वर्ष पर्यंत चलता है। ऐसे में शिक्षको को इस कार्य से दूर रखना चाहिए।
मुकेश वैष्णव, ब्लॉक अध्यक्ष, बीएलओ संघ आमेट





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