जयपुर। कांग्रेस कोर ग्रुप ने तय किया है कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार मुश्किल से बनी है, उनके किसी विधायक को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ाया जाएगा। इससे राजस्थान व मध्यप्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
कोर ग्रुप सूत्रों के अनुसार, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पार्टी की सरकार बहुमत को बरकरार रखने की चुनौती से जूझ रही है। दोनों ही राज्यों में विपक्ष भी बेहद मजबूत है, ऐसी स्थिति में पार्टी इन राज्यों के नेताओं विशेष कर विधायक चुने जा चुके नेताओं को लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार बनाने का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है।
सह प्रभारियों के बदले जा सकते हैं कार्य क्षेत्र
किसान रैली से लोकसभा चुनाव का आगाज करने के बाद अब प्रदेश कांग्रेस लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। बताया जा रहा है कि इस माह राहुल गांधी फिर राजस्थान दौरे पर आएंगे। वे सेवादल की ओर से तीन दशक बाद निकाली जाने वाली रैली में शामिल होंगे।
उधर, प्रदेश व सह प्रभारियों को भी क्षेत्रों में संगठनात्मक कामकाज को लेकर दौरे करने के लिए कह दिया गया है। लेकिन इस बार आलाकमान प्रदेश के चारों सह प्रभारियों विवेक बंसल, देवेन्द्र कुमार, काजी निजामुद्दीन और देवेन्द्र यादव के क्षेत्रों में बदलाव कर सकता है। विधानसभा चुनाव टिकट वितरण के दौरान सह प्रभारियों की भूमिका पर अलग अलग वजहों से सवाल उठे थे। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी खुद को प्रदेश में सवा सौ सीटों से ऊपर मानकर चल रही थी।
लेकिन पहले सह प्रभारियों की रिपोर्ट और बाद में टिकट वितरण में हुई गड़बडि़यों के चलते पार्टी को कई ऐसी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जहां पार्टी उम्मीदवार की जीत तय मानकर चल रहे थे। टिकट वितरण के दौरान प्रदेश के नेताओं के निशाने पर मुख्य रूप से सह प्रभारी रहे। यही वजह रही कि टिकट वितरण के दौरान एक बार तो मुख्य चर्चा से सह प्रभारियों को बाहर कर दिया गया था





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