चूरू. स्थापना के बाद से व्यापार और व्यापारियों की बाट जोह रही कृषि उपज मंडी हर महीने घाटे में जा रही है।
यही वजह है कि आर्थिक तंगी के दौर से गुजरती ये मंडी अपनी स्थापना के बाद से आज तक सी ग्रेड में ही संचालित हो रही है। फिलहाल मंडी के हालत आमद अठ्न्नी, खर्चा रुपया वाली कहावत को चरितार्थ करते नजर आ रहे हैं। मंडी के अधिकारियों के मुताबिक हर महीने करीब चार से साढ़े चार लाख रुपए की आय मंडी शुल्क व यूजर चार्ज आदि को मिलाकर होती है। वहीं मंडी का हर महीने का खर्चा करीब साढ़े पांच लाख रुपए है। मंडी प्रशासन के मुताबिक यहां कार्यरत छह स्थाई कर्मचारियों व एक संविदाकर्मी की तनख्वाह प्रतिमाह करीब चार लाख रुपए की बनती है।
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चार पेंशनर्स कर्मियों को भी पेंशन का भुगतान होता है। संविदा पर तैनात चौकीदार व सफाईकर्मियों को हर महीने ८२ हजार रुपए का भुगतान होता है। इसके अलावा बिजली-पानी के बिलों का भी भुगतान होता है। ऐसे में मंडी में हर महीने होने वाली आय से अधिक खर्चा हो रहा है।
अब तक ३८ लाख की आय
मंडी सूत्रों के मुताबिक अप्रेल २०१८ से दिसंबर २०१८ तक मंडी को करीब ३८ लाख ६६ हजार रुपए की आय हुई है। जबकि खर्चा इससे अधिक हो चुका है।
जर्जर हो चुकी दुकानें
मंडी में बनाई गई दुकानें व्यापारियों की ओर से यहां काम में नहीं लिए जाने से आज ये जर्जर हो चुकी हैं। कई दुकानों के तो खिड़कियों के दरवाजे तक लोग उतारकर ले जा चुके हैं। दो में से एक शैड बनाया गया है। दूसरा अधूरा है। पानी की टंकी जर्जर पड़ी है। यहां बेसहारा पशुओं का आवागमन रहता है। ऐसे में दुकानों में चोरी की आशंका से भयभीत व्यापारी यहां आने से कतराते हैं।
मंडी में हर महीने होने वाली आय से खर्चा अधिक हो रहा है। मंडी यहां संचालित होने से आय बढ़ सकती है।
-जगदीश प्रसाद, कर्मचारी
कृषि उपज मंडी, चूरू





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