चितलवाना. प्राचीन काल से ही पशु पक्षियों के संरक्षण को महत्व दिया गया है। जिसके तहत परिंडे बांधने और पशुओं को विभिन्न दिन दिवसों पर चारा और खाद्यदेने की परंपरा चली आ रही है।
वर्तमान समय में धीरे धीरे लोग इन परंपराओं से भलेही दूर होते जा रहे हों, लेकिन होथी गांव और दाता गांव में आज भी लोग इस परंपरा को न केवल अपनाए हुए है, बल्कि उसे मजबूती भी प्रदान कर रहे हैं। होथीगांव मठ में पक्षियों के लिए विशेष तरह का पक्षी घर (कबूतर खाना) बनाया गया है, जहां अल सवेरे से ही पक्षियों का मधुरम कलरव सुनाई देने लग जाता है और सांछ ढलने के साथ पक्षी इन कोटरों में अपनी उपस्थिति को दर्शाते हैं। दरअसल, होथीगांव में फुलमुक्तेश्वर महादेव के मंदिर के पास ही मंदिर ट्रस्ट की ओर से करीब पांच लाख की लागत से एक हजार पक्षियों के लिए पक्षी खाना बनाया गया हैं।
यहां खुद के आवास में ही पक्षीघर
दाता गांव में भागीरथराम विश्नोई ने भी पक्षियों के संरक्षण के लिए अनूठी पहल की है और अपने आवास के एक हिस्से में विभिन्न आकार और रूपों में घौंसले लगाए हैं, जिसमें पक्षी डेरा डालते हैं। इस घर में मिट्टी व प्लास्टिक के विशेष तरह के कृत्रिम घोसलेंं बनाकर लगाए गए है।
इनका कहना
पक्षियों के संरक्षण की मंशा थी, जिसके तहत मुख्य रूप से कबूतरों के संरक्षण के लिए यह कबूतरखाना बनपया है। जिसमें एक हजार पक्षी सुरक्षित रह सकते हैं।
- मंहत संतोषपुरी, होथीगांव में महादेव मठ
वर्तमान में पक्षियों के लिए रहने का स्थान कम होता जा रहा है।आधुनिकता के दौर में घरों की बनावट में अलग तरह से होने से दिक्कत हो रही है। पक्षियों के लिए घरों में मिट्टी व प्लास्टिक के घौंसले बनाकर संरक्षण कीशुरुआत की हैं।
भागीरथराम भादु, ग्रामीण दाता





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