गंगापुरसिटी. शिक्षा के मंदिरों में बच्चों की 'खुराक " उधारी पर चल रही है। उधारी की सेहत पर अब तकादे का तंज भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में स्कूलों में दूध वितरण व्यवस्था चरमरा सी गई है। पिछले करीब तीन माह से दूध के लिए बजट नहीं मिलने के कारण यह व्यवस्था पटरी से उतरी नजर आ रही है। शहरों में तो जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में फिलहाल यह योजना ठप सी हो गई है।प्रदेशभर में दो जुलाई 2018 से मिडडे-मील योजना के तहत बच्चों को गर्म दूध मिलना शुरू हुआ। इस अन्नपूर्णा योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने की थी। प्रार्थना सभा के बाद बच्चों को दूध वितरण का कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को दूध पिलाना तय किया गया, लेकिन यह योजना अब रफ्ता-रफ्ता दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकार स्तर से इसके लिए बजट नहीं मिल रहा है। ऐसे में स्कूलों को योजना का चलाना मुश्किल हो गया है। अब तक तो जैसे-तैसे उधार में काम चल भी रहा था, लेकिन अब कई जगह उधार मिलने में भी अड़चन आ गई है। ऐसे में यह योजना खटाई में पड़ती नजर रही है।
चार माह से उधारी के भरोसे दूध की आपूर्ति
बामनवास. पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की ओर से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शुरू की गई विद्यार्थियों के लिए दूध की वितरण व्यवस्था अब बजट के अभाव में चरमराने लगी है। पिछले कई माह से दूध के मद में स्कूलों को बजट नहीं मिलने से शिक्षकों को उधारी चुकाना मुश्किल हो गया है। अब तो संबंधित दूध आपूर्तिकर्ता फर्म तथा दुकानदारों ने भी शिक्षकों को उधार में दूध देना बंद करना शुरू कर दिया है। इससे शिक्षकों के सामने भी असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है कि आखिर वे भी कहां तक उधारी के भरोसे विद्यार्थियों को स्कूलों में दूध पिलाएं। इधर दूध की आपूर्ति बंद होने पर विभागीय कार्रवाई का भी डर सताता रहता है। ऐसी स्थिति में कई स्कूलों में तो जैसे-तैसे कर काम चलाया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के कई स्कूलों में बच्चों को दूध की आपूर्ति ठप है।शिक्षकों के अनुसार पिछले चार माह से पंचायत समिति क्षेत्र के स्कूलों में दूध का बजट नहीं आया है। कई स्कूल तो ऐसे हैं। जिनमें जुलाई के बाद एक पैसा भी नहीं आया है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों के लिए इस स्कीम को चलाना टेढी खीर साबित हो रहा है।
फैक्ट फाइल
प्रदेश के करीब 62 लाख से अधिक बच्चों को फायदा पहुंचाने का किया गया दावा
कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को 150 एमएल
कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को 200 एमएल
सप्ताह में तीन दिन दूध पिलाने की योजना।
मदरसों में भी लागू की गई योजना।
शहरी क्षेत्र में सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार।
ग्रामीण में सोमवार, बुधवार, शुक्रवार अथवा मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को दूध पिलाने का कार्यक्रम।
ग्रामीण क्षेत्र में 35 रुपए लीटर और शहरी क्षेत्र में 40 रुपए पति लीटर दूध खरीदना हुआ था तय।
विद्यालयों में बजट के अभाव में दूध वितरण में परेशानी आ रही है। प्रभारी जैसे-तैसे मैनेज कर रहे हैं। इस समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उम्मीद है कि इस माह बजट आ जाएगा।
हनुमान प्रसाद गोयल, सीबीईओ गंगापुरसिटी
यह सही है कि दूध के लिए बजट का आवंटन नहीं हुआ है। यह पूरे जिले की समस्या है तथा दूध के लिए बजट संबंधी मांग पत्र भिजवा दिया गया है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। बजट मिलते ही शीघ्र स्कूलों के खातों में राशि डलवा दी जाएगी।
नाथूलाल खटीक, सीबीईओ पंचायत समिति बामनवास





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