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टूटते युवाओं के सपने, नौकरियां तो दूर कोर्स का ही नहीं अता-पता

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

एक साल के एलएलएम कोर्स और एलएलबी कोर्स में पांच वर्षीय सेमेस्टर स्कीम को लेकर राज्य सरकार गंभीर नहीं है। जहां बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मंशानुरूप देश में कई संस्थान इनकी शुरूआत कर चुके हैं। वहीं प्रदेश के लॉ कॉलेज और विश्वविद्यालय पिछड़े हुए हैं। युवाओं को इनका फायदा नहीं मिल रहा है।

बार कैांसिल ऑफ इंडिया ने एलएलबी कोर्स को बेहतर बनाने, समयानुकूल नई अवधारणाओं को समावेश करने के लिहाज से सभी राज्यों को एलएलबी कोर्स में पांच वर्षीय सेमेस्टर पद्धति लागू करने के निर्देश दिए थे। पूर्व में संस्थाओं और राज्यों को 2012 तक का समय दिया गया। बाद में इसकी अवधि साल 2018 तक बढ़ा दी गई। लेकिन प्रदेश में अब तक एलएलबी में पांच वर्षीय सेमेस्टर स्कीम लागू नहीं की है।

तीन वषीर्य कोर्स संचालित
अजमेर, सिरोही, नागौर, अलवर, सीकर सहित 15 लॉ कॉलेज हैं। सभी कॉलेज में तीन साल का ही एलएलबी कोर्स संचालित है। एलएलबी को पांच वर्षीय सेमेस्टर में बांटने और नया पाठ्यक्रम बनाने की पहल नहीं हुई है। उधर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब जैसे कई राज्यों के कॉलेज और विश्वविद्यालयों इसकी शुरुआत हो चुकी है।

एलएलएम भी नहीं एक वर्षीय
बार कौंसिल ऑफ इंडिया और मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने साल 2014-15 में एलएलएम को एक वर्षीय पाठ्यक्रम बनाने के निर्देश दिए थे। पूरे देश में केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, कॉलेज में यह लागू होना था। केंद्रीय विश्वविद्यालयों, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और कुछ राज्यों में इसे अपना लिया गया। राजस्थान के लॉ कॉलेज अथवा विश्वविद्यालयों यह कोर्स शुरू नहीं हुआ है।

कहीं यह वजह तो नहीं...
पांच वर्षीय सेमेस्टर कोर्स लागू करने में सरकार हिचकती रही है। शिक्षकों, युवाओं द्वारा विरोध करने के चलते मामला ठंडे बस्ते में है। ऐसा तब है जबकि मोदी सरकार पूरे देश में विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में समान पाठ्यक्रम लागू करने पर जोर दे रही है।

पांच वर्षीय सेमेस्टर स्कीम और एक वर्षीय एलएलएम कई जगह शुरू हुए है। प्रदेश में सरकार और उच्च शिक्षा विभाग ही इसके लिए सक्षम है।
डॉ. डी. के. सिंह कार्यवाहक प्राचार्य लॉ कॉलेज



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