Breaking News
recent

मांझे ने छीना उडऩे का हक, कट गए पंख, बिछड़ गया परिवार

दीपशिखा वशिष्ठ

जयपुर. मालवीयनगर स्थित पक्षी अस्पताल। शनिवार दोपहर 2.15 बजे एक युवक भागा-भागा आया। युवक हाथ में एक कबूतर था, जिसके पंखों से मांझा उलझा हुआ था। युवक हांफ रहा था और बेजुबान पक्षी सहमा हुआ था। कबूतर की हालत देख अस्पताल का चिकित्सा स्टाफ सक्रिय हुआ और मरहमपट्टी करने लगे।
पत्रिका संवाददाता ने देर तक ठहरकर वहां बेजुबान पंछियों का दर्द जानने की कोशिश की। देखा, चिकित्सक ने कैंची ली, मांझे को काटने लगे। पंख को साफ कर रुई से दवा लगाई तो कबूतर छटपटा उठा। हालांकि कुछ देर बाद लगा, उसे अब राहत मिली है। इतने में अस्पताल के संस्थापक कमललोचन बोले, यह कोई नई बात नहीं है। मकर संक्रांति के दिनों में हर साल हर साल हजारों पक्षी घायल होते हैं। कार्यकर्ता या लोग घायल हालत में लाते हैं तो पंछी बहुत डरे हुए होते हैं। फिर दवा लगाने के बाद राहत मिलती है तो उन्हें लगता है कि अब सुरक्षित हाथों में हूं। पक्षी चिकित्सा ट्रस्ट संस्था के राजेंद्र लुहाडिय़ा ने बताया, जब भी कोई घायल पक्षी आता है, यही लगता है कि ये बेजुबां अपना दर्द भी बयान नहीं कर पाते। इसीलिए बहुत सावधानी से इलाज करते हैं।

ताकि स्वस्थ होने के बाद उड़ जाए पंछी
पत्रिका संवाददाता ने देखा, घायल पक्षियों के पिंजरे पर ऊपर की ओर वाला एक हिस्सा खुला हुआ था। कारण पूछा तो कमललोचन, अजय ऋषि और राजेंद्र लुहाडिय़ा एकसाथ बोले, यह पिंजरे का यह छोटा हिस्सा ऊपरी गेट है। इसे इसलिए खुला रखते हैं ताकि स्वस्थ होने के बाद पंछी स्वत: उड़ जाए। इस खुले हिस्से से कई बार दूसरी पंछी घायल पक्षियों के पास आते हैं। इतने में एक स्वस्थ कबूतर दीवार पर बैठा, इधर-उधर झांकने के बाद ङ्क्षपजरे के खुले हिस्से से अंदर आकर घायल कबूतर के पास बैठ गया। थोड़ी देर बाद दोनों दाना चुगने लगे।

पंख कटने और साथियों से बिछड़ गया
पक्षी अस्पताल के बाद पत्रिका ने चिडिय़ाघर स्थित पशु चिकित्सालय का हाल देखा। वहां घायल विदेशी पंछी पेलिकन बेबस सा दिखा। मानो कह रहा हो, प्रजनन के लिए मैं दक्षिण यूरोप से पाकिस्तान होते हुए अपने साथियों के साथ भारत आया था। लेकिन मांझे ने मेरा पंख काट दिया। अब मैं उड़ नहीं सकता। परिवार से बिछड़ गया हूं। अब परिवार से कभी मिल पाऊंगा, घर लौट पाऊंगा या नहीं, पता नहीं। उसका इलाज कर रहे पशु चिकित्सक अरविंद माथुर ने बताया, पेलिकन का बायां पंख ज्यादा कट गया था। बारह टांके आए हैं। इसे सही होने में करीब 20 दिन लगेंगे। दर्द और अपनों से बिछडऩे के कारण यह चिड़चिड़ा हो गया है। वन्यपक्षी होने के कारण इसे अलग पिंजरे में रखा है।


फैक्ट फाइल
- 03 प्रवासी पक्षी घायल हालत में आए थे चिडिय़ाघर में पिछले साल, इस साल अब तक 2 आ चुके हैं
- 40 प्रतिशत पंछियों की तो मौत हो जाती है मांझे से घायल होने के बाद, 60 प्रतिशत की ही बच पाती है जान
- 2400 से ज्यादा घायल पक्षी आए थे मालवीयनगर स्थित पक्षी अस्पताल में पिछले साल
(कबूतर, चिडिय़ा, तोता, मोर, उल्लू और चील घायल होते हैं सबसे ज्यादा)



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.