नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा अपनी बहन प्रियंका गांधी को पार्टी का महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाने को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा और महागठबंधन के बीच सियासी जंग होगी न कि कांग्रेस और भाजपा के बीच। इसके पीछे उनका तर्क यह है कि तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी कांग्रेस मजबूत विपक्ष के रूप में उभरकर सामने नहीं आ पाई है। बता दें कि पीके सक्रिय राजनीति में आने से पहले देश के चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। इसलिए उनका यह बयान काफी मायने रखता है। लेकिन उनके बयान में कितना दम है इस बात को साबित होने के अभी सियासी पंडितों को इंतजार करना होगा।
आक्रामक रणनीति कितना कारगर
दूसरी तरफ राहुल गांधी द्वारा प्रियंका गांधी को बुधवार को महासचिव नियुक्त करने के बाद से इस बता की चर्चा जोरों पर है कि अब लोकसभा चुनाव का समीकरण ध्वस्त बदल जाएगा और कांग्रेस को इसका सीधा लाभ मिलेगा। चुनावी पंडित भी कमोवेश इस बात को मानकर चल रहे हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस नेतृत्व ने ऐसा कर लोकसभा चुनाव में नैरेटिव्स को बदलने की भी पुरजोर कोशिश की है। ताकि पीएम मोदी और सीएम योगी के ईमेज को उत्तर प्रदेश में चुनौती पेश कर भाजपा को केंद्र की सत्ता तक पहुंचने का रोकना संभव हो सके। इस रणनीति के तहत कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ आक्रामक रुख पहले की तरह बरकरार रखते हुए सपा-बसपा के गठबंधन व ममता बनर्जी के थर्ड फ्रंट के खिलाफ नरम रुख अपनाए हुए हैं। इससे साफ है कि कांग्रेस का लक्ष्य मोदी को दोबारा सत्ता में आने से रोकना है न कि अन्य विपक्षी ताकत को कमजोर करना।
महागठबंधन से भी खतरा कम नहीं
इसके बावजूद पीके के बयान से इस बात का संकेत मिलता है कि आगामी दिनों में महागठबंधन और थर्ड फ्रंट का मजबूत होने की स्थिति में कांग्रेस दोनों मोर्चे से अलग चुनाव लड़ने के मजबूर होगी। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा के साथ महागठबंधन व क्षेत्रीय ताकतों को भी मात देने की चुनौती भी कांग्रेस के सामने होंगी। कम से कम प्रशांत किशोर के इस बयान से तो यही संकेत मिलता है।
JD(U) vice-president Prashant Kishor said it will be a fight between the BJP and the 'mahagathbandhan' (grand alliance) in the upcoming Lok Sabha elections as the Congress is still not strong opposition
— ANI Digital (@ani_digital) January 24, 2019
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