अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. फसल बीमा योजना के नियम किसानों के साथ ठगी कर रहे हैं। बीमा की प्रीमियम राशि तो किसान से प्रत्येक खेत में बोई गई अलग-अलग फसल के अनुसार एक-एक किसान से ली जाती है, लेकिन जब खराबा होता है और क्लेम देने का नम्बर आता है, तो कम्पनी पूरे उपखंड मुख्यालय के खराबे का आकलन करती है और उस हिसाब से हुए खराबे का क्लेम महीनों बाद किसान को चुकाती है। ऐसे में कई बार पाला पडऩे और खंड बारिश व अन्य कारणों से पूरे ब्लॉक में नुकसान नहीं होता और खेत का बीमा होने के बाद भी किसान को कम्पनी कोई क्लेम नहीं देती। ऐसे में खराबा होने के बाद भी किसान पुनर्भरण के दायरे में नहीं आ पाते जिससे किसान को दोहरी मार झेलनी पड़ती है।
नहीं मिल पाता पुनर्भरण
बीमा कम्पनी अलग-अलग फसलों पर बीमे का क्लेम पास करती हैं, जिसमें मक्का की फसल 90 फीसदी खराब होने पर उस वर्ष की तय फसल राशि के अनुसार प्रति हैक्टेयर की दर से, ज्वार में 80 फीसदी पर, ग्वार में 90 फीसदी पर, कपास में 80 फीसदी पर पूरा क्लेम दिया जाता है। खराबे का आकलन ब्लॉक स्तर पर होने से ज्यादातर खराबे का प्रतिशत 50 से 60 फीसदी पर ही सिमट कर रह जाता है, जिससे बीमा धारक किसान की पूरी फसल खराब होने पर भी उसे मामूली क्लेम राशि ही मिलती है।
ऐसे देती है कम्पनी क्लेम
उदाहरण के तौर पर एक ब्लॉक में 6 हजार हैक्टेयर भूमि पर खेती हुई, पाले या खंड बारिश से 3 हजार हैक्टेयर की सतप्रतिशत फसल खराब हो गई और 3 हजार हैक्टेयर पर कोई खराबा नहीं हुआ। अब कम्पनी औसत खराबा 50 फीसदी मानती है और खराबे वाले किसानों को महज ५० प्रतिशत खराबे का क्लेम ही दिया जाता है।
जिले में औसत 42 हजार किसान करवाते हैं फसलों का बीमा
राजसमंद जिले में रबी और खरीफ की दोनों प्रमुख फसलों में औसत ३६ हजार बीमा होते हैं। यहां खरीफ 2017 में 29331 किसानों ने बीमा करवाया जबकि वर्ष 2016 खरीफ में 29074, तथा रबी में 18766 किसानों ने बीमा करवाया। वर्ष 2018 की दोनों फसलों में 41 हजार से अधिक किसानों ने बीमा करवाया।
महीनों बाद मिलता है क्लेम
फसलों में खराबा होने पर पहले पूरे क्षेत्र की गिरदावरी होती है, उसके बाद प्रशासन रिपोर्ट तैयार करवाता है। कई महीनों बाद बीमा कम्पनी किसान को क्लेम की राशि देती है। वर्ष 2016 में भी यहां करीब आठ माह बाद किसानों को क्लेम राशि का भुगतान हुआ था। ऐसे में फसल खराबे की मार से आहत किसानों के पास अगली फसल बोने के लिए लागत राशि तक नहीं होती है, जिससे कई बार उनके खेत खाली ही पड़े रह जाते हैं।
सरकार तय करती है नियम...
बीमा कम्पनी ब्लॉक स्तर पर ही खराबे का क्लेम औसत निकाल कर तय करती है। अब उनके नियम में यही है, बीमा की शर्तें आदि सरकार स्तर पर तय होता है। हालांकि जिले में अभीतक बीमा कम्पनी ने नियमानुसार भुगतान किए हैं।
-रविंद्र कुमार वर्मा, उपनिदेशक कृषि, राजसमंद





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