गुवाहाटी: लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद पूर्वोत्तर में सियासी बवाल मचा हुआ है। असम गन परिषद के अध्यक्ष और राज्य में कृषि मंत्री अतुल बोरा ने इस्तीफा दे दिया है। बोरा के अलावा जल संसाधन मंत्री केशव महंत और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री फनीभूषण चौधरी ने यहां राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को अपना इस्तीफा सौंपा। दरअसल मंगलवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पारिस होने के बाद असम में भाजपा का जमकर विरोध हो रहा है। एजीपी ने इस बिल को लेकर गठबंधन तोड़ लिया है।
Guwahati: Asam Gana Parishad (AGP) leaders including Atul Bora leave after tendering resignation as state Ministers to assam cm Sarbananada Sonowal. AGP quit that BJP-led Assam Govt in protest against #CitizenshipAmendmentBill. pic.twitter.com/oQ1jzIBVvq
— ANI (@ANI) January 9, 2019
जनता से किया वादा निभाया-बोरा
इस्तीफा देने के बाद अतुल बोरा ने कहा कि असम की जनता से किए गए वायदे के अनुसार हमने इस्तीफा दे दिया है। राज्य में विधेयक के खिलाफ जोरदार विरोध हो रहा है। हम जनता के साथ होंगे। अपने त्यागपत्र में बोरा ने लिखा है कि मैं नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करता हूं और मुझे लगता है कि इससे असम के लोगों को नुकसान पहुंचेगा।गौरतलब है कि 126 सीट वाली विधानसभा में भाजपा के पास 74 विधायक हैं। एजीपी के 14 एमएलए हैं। ऐसे में सरकार पर कोई संकट नहीं आएगा।
राज्यसभा में राजनाथ सिंह ने दिया जवाब
गौरतलब है कि मोदी सरकार ने शीतकालीन सत्र में दो बड़े बिल को पेश किए। पहला नागरिकता संशोधन बिल और दूसरा सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण का बिल। इन दोनों बिलों को लेकर जमकर हंगामा भी हुआ है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि विधेयक के बारे में 'गलतफहमी' फैलाई जा रही है। राजनाथ ने कहा कि विधेयक असम या पूर्वोत्तर के राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। नागरिकता संशोधन विधेयक बांग्लादेश, पाकिस्तान व अफगानिस्तान के छह अल्पसंख्यक समूहों के पात्र प्रवासियों के भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की बाधाओं को दूर करने के लिए लाया गया है। राजनाथ ने कहा, "इन सताए गए प्रवासियों का बोझ पूरा देश साझा करेगा।





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