जयपुर. प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के एक महीने बाद भी काउंटरों पर निशुल्क दवा की अनुपलब्धता समस्या बनी हुई है। चिकित्सा विभाग ने करीब बीस दिन से लगातार प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों के औचक निरीक्षण सहित निर्देश देकर मरीजों को पर्ची पर लिखी गई सभी दवाएं काउंटर से निशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, लेकिन अभी तक भी अस्पतालों में कुछ दवाओं पर अनुपलब्धता के ठप्पे लगातार लगाए जा रहे हैं। दवाओं को लेने के लिए मरीजों को या तो लाइफ लाइन सेंटर या निजी दवा दुकान पर ही जाना पड़ रहा है। पत्रिका ने राजधानी के दो सबसे बड़े अस्पतालों में शामिल सवाई मानसिंह अस्पताल और जयपुरिया अस्पताल में दवा काउंटरों से दवा लेकर निकले मरीजों और परिजनों से बात की तो यह सच निकलकर सामने आया।
एसएमएस अस्पताल में तो अब भी दवा पर्चियों पर अनुपलब्धता के ठप्पे ही लगाए जा रहे हैं। वहीं जयपुरिया में तो ठप्पा लगाने के बजाय पेन से ही अनुपलब्ध दवा पर क्रॉस का निशान लगाया जा रहा है।
मिला यह जवाब
संवाददाता ने जयपुरिया के निशुल्क दवा काउंटर पर कर्मियों से क्रॉस के निशान का मतलब और आधिकारिक ठप्पा भी नहीं लगाए जाने का कारण पूछा तो जवाब मिला कि क्रॉस ऐसे मरीजों की पर्चियों पर लगा रहे हैं, जो सरकारी कर्मचारी हैं। अन्य सामान्य मरीजों की पर्ची पर अनपुलब्धता का ठप्पा लगाते हैं।
एसएमएस में भी नहीं मिल रही पूरी दवाइयां
जयपुर के ही सुभाष चौक से आए एक मरीज ने एसएमएस के दवा काउंटर से दवा लेने के बाद बताया कि उन्हें बैचेनी की शिकायत रहती है। पर्ची दिखाते हुए उन्होंने कहा कि दो दवाइयां नहीं मिली।
पर्चियों पर लगा था क्रॉस
जयपुरिया अस्पताल में दोपहर करीब 12 बजे दवा काउंटर पर जगतपुरा स्थित कच्ची बस्ती से आए मरीज और उनके परिजनों ने बताया कि उनकी पर्ची पर दो दवाओं पर अनुपलब्धता का ठप्पा लगा दिया गया है। ये दवा वे अब कहां से लेंगे, इस पर कहा, बाहर निजी दवा दुकान से ही दवा खरीदेंगे।
नहीं माने जा रहे आला अफसरों के निर्देश
चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में निशुल्क दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने पर स्थानीय निधि से खरीदकर मरीज को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। वहीं विभाग के विशिष्ट शासन सचिव व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. समित शर्मा भी बार-बार अस्पतालों के निरीक्षण व बैठकों में निशुल्क दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दे चुके हैं।





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