महिला पुलिसकर्मियों की काउंसलिंग आ रही काम
श्रीगंगानगर. इस आर्थिक युग में परिवार की गाड़ी के दो पहियों में अहम के टकराव के चलते दांपत्य जीवन दरकता नजर आता है। वहीं इस टकराव को रोकने का जिम्मा परिवार के बुजुर्ग लोगों के बाद अब पुलिस का आता है, जिसे पुलिस ने बखूबी निभाया हैं। इलाके में पुलिस की समझाइश से हर साल सैंकड़ों परिवारों को टूटने बचा जा रहा है। गत वर्ष 2018 में ही पुलिस की काउंसलिंग से करीब एक हजार परिवारों को फिर से गृहस्थ जीवन बसाने के लिए राजी किया।
पुलिस अधिकारियों की मानें तो महिला थाने में वर्ष 2018 में दहेज प्रताडऩा व अन्य को लेकर 1016 परिवाद महिलाओं की ओर से दिए गए। इन परिवादों पर पुलिस की ओर से मामले दर्ज करने से पहले दोनों पक्षों की समस्याएं सुनी जाती है और प्रयास रहता है कि परिवार नहीं टूटे और पति-पत्नी मनमुटाव भूलकर शांति से अपना जीवन यापन कर सकें। इसके लिए महिला पुलिसकर्मियों की ओर से काउंसिलिंग के कई दौर चलते हैं। उनको रिपोर्ट दर्ज होने व उसके बाद आने वाली परेशानियों आदि के संबंध में जानकारी दी जाती है। सभी पक्षों को समझाइस चलती है। जो समस्या होती है उसको दूर करने का प्रयास किए जाते हैं। पिछले साल मिले इन परिवादों में काउंसिलिंग के जरिए 1016 में 20 परिवादों पर ही मामले दर्ज हुए। जबकि 996 प्रकरणों में घर बसाए गए।
थाने में ऐसे होती है काउंसलिंग
- महिला थाने में दहेज प्रताडऩा व पति-पत्नी के झगड़ों को लेकर आने वाले प्रकरणों में काउंसिलिंग करने वाली सबइंस्पेक्टर कलावली चौधरी व सबइंस्पेक्टर सुमन जयपाल बताती हैं कि परिवाद आने के बाद सबसे पहले महिला की काउंसलिंग की जाती है। उसकी क्या समस्याएं हैं। समस्या में अधिकतर पति-पत्नी के बीच अहम का टकराव ही सामने आता है। यह टकराव खुद की समस्याओं से नहीं बल्कि परिवार के लोगों की ओर से होता है। महिला की पीड़ी सुनने के बाद पति की काउंसिलिंग होती है। जिसमें समस्या का निचौड़ निकल आता है। परिवार के अन्य सदस्यों को भी समझाया जाता है। दोनों को एक-दूसरे की कमियां बताई जाती है। इसके बाद दोनों पक्षों को परिवाद से होने वाले मुकदमें, बयान, सामान बरामदगी, कोर्ट की प्रक्रिया आदि से अवगत कराया जाता है। महिलाओं को यह भी बताया जाता है कि जो बात सोचकर वे आईं है कि जाते ही पति व परिवार को हवालात में बंद करवा दूंगी। ऐसा नहीं है। कानून की अपनी सीमाएं हैं। मामले के निष्कर्ष के बारे में भी अवगत कराया जाता है। उनके बच्चों के भविष्य के बारे में भी समाज में हो रही घटनाओं से अवगत कराया जाता है। इससे दोनों खुद ही राजीनामा कर लेते हैं और घर चले जाते हैं। पीडि़तों का घर बसता देखकर पुलिसकर्मियों को खुशी होती है।
परिवार बिखरने से आती है मानसिक विकृति
- परिवारों के बिखरने से जहां दोनों पक्षों पर तो मानसिक असर पड़ता ही है लेकिन इसका बच्चों पर सबसे अधिक पड़ता है। काउंसलरों का कहना है कि परिवार बिखरने से बच्चों को सबसे अधिक मानसिक परेशानी उठानी पड़ती है। घरेलू झगड़ों, मां-बाप के अलग होने आदि की घटनाओं से उनमें मानसिक विकृति उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है, जो समाज के लिए घातक होता है। हाल ही घमूडवाली थाना इलाके में मां को गालियां निकालने पर एक बेटे ने पिता की हत्या कर दी। घरेलू झगड़े के कारण मानसिक विकृति का रूप है।
इनका कहना है
- महिला प्रताडऩा से संबंधित परिवादों में पहले समझाइस कर परिवारों को टूटने से बचाने के प्रयास किए जाते हैं। जिससे घर सलामत रहे। इसके लिए महिला सबइंस्पेक्टर स्तर की अधिकारी काउंसलिंग करती हैं और दोनों पक्षों को समझाया जाता है। गत वर्ष थाने में 996 परिवादों में समझाइस कर परिवारों को टूटने से बचाने का कार्य किया गया है।
नरेन्द्र पूनियां, थाना प्रभारी महिला थाना श्रीगंगानगर।





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