जीतेश रावल@ जालोर. टीबी मरीजों के लिए नया साल राहत लेकर आ रहा है। अब हर मरीज की सीबी नोट मशीन से जांच होगी, ताकि उपचार में असरकारक दवा ही शामिल हो सके। अभी तक टीबी मरीजों को पांच श्रेणियों में बांटते हुए उपचार किया जा रहा था, लेकिन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत सभी श्रेणियों को खत्म कर दिया है। अब आने वाले हर नए व पुराने मरीज को प्रथम श्रेणी का ही उपचार दिया जाएगा। साथ ही सीबी नोट से जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद मरीज की पहचान हो सकेगी। इस आधार पर मरीज के लिए रेसिस्टेंट होने वाली ड्रग का पता चल जाएगा। इससे उपचार में असरकारक दवाइयां ही शामिल होंगी, जिससे टीबी पर सीधा अटैक होगा। टीबी उन्मूलन की दिशा में यह कारगर कदम बताया जा रहा है।
पहचान में आएंगे सेंसेटिव व रेसिस्टेंट मरीजों
टीबी मरीजों को कम समय में बड़ा लाभ देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत टीबी मरीजों की अभी तक चल रही पांच श्रेणियां खत्म कर दी है। अब एक ही श्रेणी में उपचार दिया जाएगा। इससे सेंसेटिव व रेसिस्टेंट टीबी मरीजों की आसानी से पहचान हो सकेगी। उसी के अनुरूप उपचार भी दिया जा सकेगा।
उपचार में से हट जाती है रेसिस्टेंट ड्रग
उपचार से पहले टीबी मरीज की सीबी नोट मशीन से जांच करना कारगर प्रक्रिया साबित होगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी ड्रग के प्रति रेसिस्टेंट की रिपोर्ट मिलने पर ही पता चलता है कि सम्बंधित मरीज के लिए यह ड्रग असरकारक नहीं है। उपचार के लिए उसे ऐसी ड्रग देनी होती है, जो उसके लिए रेसिस्टेंट न हो। जांच रिपोर्ट के जरिए यह पहचान होने के बाद उपचार में से रेसिस्टेंट ड्रग को हटाकर असरकारक दवाइयां शामिल की जाती है, जिससे मरीज जल्द ठीक होने लगता है।
अब प्रथम श्रेणी व एमडीआर ही
नई गाइड लाइन के अनुसार यदि कोई भी पुराना या नया मरीज उपचार के लिए आता है तो प्रथम श्रेणी से ही उसका उपचार शुरू किया जाएगा। उपचार शुरू होते ही सीबी नोट मशीन से जांच करेंगे। मरीज की जांच रिपोर्ट सेंसेटिव आती है तो प्रथम श्रेणी का ही उपचार जारी रखा जाएगा और छह माह तक उपचार चलेगा। वहीं, यदि सीबी नेट जांच में रिपोर्ट मरीज रेसिस्टेंट मिलता है तो प्रथम श्रेणी से बदलकर पीएमडीटी गाइड लाइन के अनुसार उसका एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) का उपचार शुरू किया जाएगा।
जालोर व सांचौर में है मशीन
उपचार के लिहाज से जालोर जिले में सीबी नोट की दो मशीन कार्यरत है। इसमें से एक जिला मुख्यालय व दूसरी सांचौर में संचालित हो रही है। सांचौर काफी दूरस्थ होने के कारण वहां के मरीजों को जिला मुख्यालय तक आने में भारी परेशानी रहती है। ऐसे में अक्सर समय पर इलाज भी नहीं ले पाते। वहीं पर मशीन व जांच की सुविधा मिलने से टीबी मरीजों को काफी राहत मिल सकती है। अधिकारी बताते हैं कि इन जगहों पर जांच कार्य सुचारू है।
मरीज जल्द क्योर होंगे...
सीबी नोट मशीन से जांच करने के बाद टीबी मरीज का उपचार शुरू होगा, जिससे मरीज जल्द क्योर होंगे। टीबी उन्मूलन की दिशा में यह योजना कारगर साबित होगी।
- डॉ. सुरेशकुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी, जालोर





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