भीलवाड़ा।
भीलवाड़ा अरबन को-ऑपरेटिव बैंक में ढाई करोड़ का गबन कर फरार हुआ कैशियर आखिरकार रविवार को कोतवाली पुलिस के हत्थे चढ़ गया। आरोपी जयपुर में अपने ससुराल में दूर के रिश्तेदार के यहां शरण ले रखी थी। वह अग्रिम जमानत के सिलसिले में वकील से राय लेने के लिए भीलवाड़ा आया था। कोतवाली पुलिस ने उसे सुवाणा निकट से हिरासत में ले लिया। पुलिस उसे थाने लाकर देर शाम गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की।
पुलिस अधीक्षक योगेश यादव ने बताया कि बैंक कैशियर नागमणी कॉलोनी, सांगानेर (जयपुर) निवासी राजेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ बैंक प्रबंधन ने २ करोड़ ५१ लाख रुपए के गबन मामला दर्ज कराया गया था। प्रारंभिक पूछताछ में राजेश ने बताया कि उसने गबन की राशि उसने वायदा कारोबार (डिब्बा बंद) और क्रिकेट सट्टे में उड़ा दी। पुलिस उसके साथ बैंक के अन्य कर्मचारियों के लिप्त होने के बारे में भी पूछताछ कर रही है।
गत 29 दिसम्बर को बैंक खाताधारक प्रशांतकुमार बाबेल बैंक से 3.60 लाख के नए नोट लेकर गए थे। अगले दिन नोट गिनने पर 54 हजार रुपए कम निकलने पर उन्होंने बैंक प्रबंधकों से शिकायत की। इस पर जांच के लिए 31 दिसम्बर को बैंक में रखे नोटों की गिनती शुरू की गई, तो राजेश आनाकानी करने लगा। छोटे नोट गिनते-गिनते भोजनावकाश होने पर वह चाय पीने का बहाना बना बैंक से बाहर गया व फरार हो गया। उसके बाद जांच में ढाई करोड़ रुपए कम निकले थे। बैंक प्रबंध संचालक धर्मेन्द्र वर्मा ने कोतवाली में 1 जनवरी को गबन का मामला दर्ज कराया, तभी से आरोपी फरार था।
जाल बिछाया तो फंस गया आरोपी
प्रशिक्षु आरपीएस अदीति चौधरी के नेतृत्व में गठित टीम ने दो बार जयपुर में दबिश दी। उपनिरीक्षक नंदूसिंह, हैड कांस्टेबल सहीराम, रामप्रसाद, कांस्टेबल संजय, पवन ने उसके ससुराल और घर पर दबिश दी। उस समय राजेश वहां नहीं मिला, लेकिन पुलिस ने कुछ रिश्तेदारों से सम्पर्क बनाए रखा। राजेश के बारे में पता लगते ही बताने के लिए कहा। पता चला कि राजेश ने भीलवाड़ा में कुछ लोगों से सम्पर्क साधा था। एक वकील के भी सम्पर्क में आया। पुलिस ने जाल बिछाया और वकील से सम्पर्क के बहाने राजेश को बुलाया। यहां पहुंचने पर उसे दबोच लिया।
बाइक से भागा, नसीराबाद में लिए पांच सौ उधार
राजेश ने बताया कि वह 31 दिसम्बर को मोटरसाइकिल से जयपुर के लिए रवाना हुआ। नसीराबाद में रिश्तेदार से पांच सौ रुपए उधार लेकर जयपुर पहुंचा। वहां एक रात घर पर रहा। अगले दिन जयपुर में ही ससुराल में दूर के रिश्तेदार के घर पर शरण ली। तेरह दिन से वहीं ठहरा हुआ था।
डूबती गई राशि, बढ़ता गया गबन
राजेश वायदा कारोबार में उलझ गया। हानि हुई तो भरपाई के लिए गबन करके और राशि ले गया। इसके अलावा क्रिकेट सट्टे का भी शौक लग गया। राशि की भरपाई के लिए गबन करता रहा। वायदा कारोबार और क्रिकेट के सट्टे में राजेश को किसने डाला उसका पता किया जा रहा है।
नोटबंदी का उठाया था फायदा
आरोपी डेढ़ साल से बैंक से रोजाना राशि गायब करता रहा। उसने बताया कि नोटबंदी का उसको बड़ा फायदा मिला। उस समय दो हजार का नोट चलाया गया था। वह छोटे नोटों की गड्डी के आगे और पीछे दो हजार का नोट लगा देता था। इससे नोटों के भौतिक सत्यापन के दौरान वह दो हजार की गड्डी मानी गई। इससे नोट गायब होते रहे।
ऑडिट में रख दी राशि
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि बैंक में दो तरह से ऑडिट होती थी। साल में एक बार आरबीआइ ऑडिट करवाती है। उस समय उसने कहीं से जुटाकर राशि रख दी। एेसे में स्ट्रांग रूम में राशि का मिलान हो गया। बैंक निजी स्तर पर भी ऑडिट करवाता है, लेकिन वह कागजी होती है। उसमें स्ट्रांग रूम से राशि की गणना नहीं की जाती है।





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