राजसमंद. कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता है। जाने अनजाने में हुए अपराध का उचित पश्चाताप करके एवं भविष्य में अपराध नहीं करने का संकल्प करके व्यक्ति अपना शेष जीवन अच्छी तरह बिता सकता है।
यह बात रविवार को जिला कारागृह में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा द्वारा आयोजित कैदी सुधार कार्यशाला में पूर्व उप शासन सचिव विधि (गृह) न्यायविद् डॉ. बसंतीलाल बाबेल ने बतौर मुख्य अतिथि कही। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार चतुर कोठारी ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी राजकुमार दक, जिला कारागृह उपाधीक्षक शिवेन्द्र कुमार शर्मा एवं ब्रजलाल कुमावत थे। बाबेल ने कहा कि व्यक्ति नहीं चाहते हुए भी अपराध कर बैठता है। कई बार क्षणिक क्रोध, राग-द्वेष एवं अहंकार के भाव से भी जघन्य अपराध हो जाते हैं, ऐसे में हमें अपने मन में शांति लाने का प्रयास करते हुए धैर्य रखते हुए विवादों से बचना चाहिए। शिक्षाविद् चतुर कोठारी ने कहा कि कारागृह को सुधार गृह के रूप में मानते हुए जो कुछ हो गया, उसे भूलें एवं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हुए ऐसा स्वभाव बनाएं जिससे समाज उन्हें पुन: स्वीकार करे। समाजसेवी राजकुमार दक ने कहा कि वह व्यक्ति महान होता है जो सहनशीलता के साथ समस्याओं का हल खोजे, दूसरों की गलतियों को नजरअंदाज करने का भाव रखें। कारागृह उपाधीक्षक शर्मा ने कहा कि कमाई के लिए अपराध नहीं करें बल्कि अच्छे कार्यों को करके पैसा कमाने का लक्ष्य रखें। प्रायश्चित से आधा अपराध क्षम्य हो जाता है। अपने अहंकार एवं दुष्प्रवृत्यिों को त्यागने का अभ्यास करें। आभार जेल प्रहरी कालूराम मीणा ने ज्ञापित किया।





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