कोटा. नगर निगम के डीजल घोटाले की जांच की गेंद अब सरकार के पाले में है। जल्द ही मुख्यालय से टीम गठित होने की संभावना है। यह मामला स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल तक पहुंच गया है। उधर मंगलवार देर शाम को निगम आयुक्त ने गैराज के कनिष्ठ अभियंता समेत चार कर्मचारियों को गैराज से हटा दिया है।
पार्षद गोपालराम मंडा ने कार्यसमिति की बैठक में लगाए गए डीजल चोरी के आरोपों को देखते हुए महापौर के निर्देश पर मंगलवार को आयुक्त ने गैराज से कनिष्ठ अभियंता समेत 4 कर्मचारियों को अन्यत्र लगा दिया। साथ ही मामले की जांच के लिए स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को पत्र लिखा गया है।
महापौर महेश विजय ने बताया कि पार्षद मंडा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच प्रभावित नहीं हो, इसके लिए कनिष्ठ अभियंता अजीत सिंह, कनिष्ठ सहायक रविंद्र गोस्वामी, टाइम कीपर मुरली विजय तथा जीटीओ बालम सिंह का स्थानांतरण कर दिया है। प्रकरण में उपायुक्त कृष्णा शुक्ला पर भी आरोप लगाए गए हैं, इसे देखते हुए मामले की जांच के लिए स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच के लिए कहा गया है।
घोटाले को दबाने की शिकायत
पार्षद राखी गौतम के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने ज्ञापन देकर घोटाले की जांच करवाने की मांग की है। ज्ञापन में पार्षदों ने कहा कि निगम प्रशासन घोटाले की जांच को मजाक बना कर रख दिया है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि महापौर दोषियों को बचाना चाहते हैं। पार्षद दिलीप पाठक ने बताया कि ज्ञापन की प्रति स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल को भेज दी गई है। प्रतिनिधि मंडल में पार्षद मोहम्मद हुसैन मोम्दा, शमा मिर्जा, मोनु कुमारी व कांग्रेस नेता विद्याशंकर गौतम आदि शामिल थे।
डीजल घोटाले को लेकर गंभीर हैं। जांच में पार्षद मण्डा द्वारा लगाए गए आरोप सत्य पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरोपों की जांच निष्पक्ष हो, इसके पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। किसी को नहीं बक्शा जाएगा। महेश विजय महापौर
इन्हें लगाया गैराज में
गैराज में अब वरिष्ठ सहायक जयराज सिंह व ऋ तुराज को लगाया गया है। गैराज से हटा गए कार्मिकों को निर्देशित किया गया है कि वे नवीन पद स्थापित कार्मिकों को तुरन्त अपना रिकार्ड संभलाने के बाद नवीन पद स्थापन की जगह पर ज्वाइनिंग प्रस्तुत करें। गैराज में लगाए गए कार्मिकों को निर्देशित किया गया है कि वे तुरन्त प्रभाव से गैराज अनुभाग में ज्वाइनिंग प्रस्तुत करें।
सात दिन लग गए कर्मचारियों का हटाने में
कार्य समिति की 16 जनवरी को हुई बैठक में डीजल घोटाला उजागर किया गया था। पार्षद गोपालराम मण्डा ने कर्मचारियों को हटाने की मांग की थी, लेकिन कर्मचारियों को हटाने में सात दिन लग गए हैं। डीजल का रिकॉर्ड भी इन कर्मचारियों के पास ही था, इसलिए रिकॉर्ड में हेराफेरी से इनकार नहीं किया जा सकता





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