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साढ़े तीन हजार तो दूर की बात साढ़े छह सौ रुपए भी समय पर नहीं मिल रहे

जितेन्द्र योगी. झुंझुनूं

विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में शिक्षित बेरोजगारों को साढ़े तीन हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की थी। कांग्रेस सत्ता में भी आ गई, परंतु एक महीने से अधिक का समय होने के बाद भी सरकार ने इस मसले पर चर्चा तक नहीं की है। ऐसे में बेरोजगार युवकों को साढ़े तीन हजार रुपए मिलना तो दूर की बात है जो पहले से मिल रहा भत्ता साढ़े छह सौ और साढ़े सात सौरु पए भी नहीं मिल रहा है। बेरोजगार युवक रोजाना भत्ते के लिए रोजगार कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जुलाई के बाद से इन बेरोजगार युवकों को भत्ता नहीं मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक अप्रेल २०१८ तक विभाग ने बेरोजगार युवकों को डेढ़ करोड़ रुपए बेरोजगारी भत्ते के दिए थे। लेकिन इसके बाद बेरोजगारों को भत्ते का पैसा नहीं मिला है।

 

दो करोड़ से अधिक का चाहिए बजट
अधिकारियों की मानें तो बेरोजगार युवकों को दिसंबर तक का भत्ता देने के लिए कम से कम दो करोड़ रुपए का बजट चाहिए। लेकिन अभी तक विभाग को सरकार से नाम मात्र की राशि भी नहीं मिल पाई है। जबकि बजट के लिए दो बार पत्र लिखे जा चुके हैं, जिनका हां या ना तक का जवाब नहीं मिल पाया है।

 

पांच हजार से अधिक हैं भत्ते से वंचित
अधिकारियों की मानें तो झुंझुनूं जिले में स्नात्तक बेरोजगार युवाओं की संख्या बड़ी है।दसवीं, 12वीं, स्नात्तक व स्नात्तकोत्तर समेत अन्य डिग्रिया प्राप्त ४५ हजार १३९ बेरोजगारों का पंजीयन रोजगार कार्यालय में हैं।इनमें पांच हजार १७८ बेरोजगार युवा ऐसे हैं जो वर्तमान में भत्ते के लिए पात्र हैं, जबकि बिना पंजीकृत के बेरोजगारों की भरमार है। पात्र बेरोजगारों को जुलाई के बाद भत्ता नहीं मिल पा रहा है।
ये मिल रहा है बेरोजगारों को भत्ता पुरुष बेरोजगार को साढ़े छह सौ और महिला बेरोजगार को साढ़े सात सौरुपए प्रतिमाह भत्ता दिया जा रहा है। इसके अलावा निशक्तजनों की श्रेणी में आने वाले बेरोजगार चाहे वह महिला हो या पुरुष साढ़े सात सौ रुपए प्रतिमाह दिया जाता था।

 

दो साल तक मिलता है भत्ता
अंचल के बेरोजगार युवाओं को स्नात्तक करने के बाद पात्र मानते हुए आवेदन करने पर भत्ता शुरू किया जाता है। भत्ते के लिए स्नात्तक होने के साथ-साथ उसकी पारिवारिक आय सालाना दो लाख रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।अगर किसी बेरोजगार की पारिवारिक आय दो लाख रुपए से ज्यादा है तो उसे पात्र नहीं माना जाता है।

 

इनका कहना है...
विधानसभा चुनावों में ढाईमहीने आचार संहिता के कारण भत्ता बंद कर दिया था। कुछ बजट का भी अभाव है। १५-२० दिन में भत्ता मिलने की स्थिति क्लीयर हो जाएगी।
दयानंद यादव, जिला रोजगार अधिकारी (झुंझुनूं)



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