ये पौधे नहीं छोटे बच्चे हैं साहब, इनको पालना नहीं है कोई हंसी मजाक
जिले की अजमेर, किशनगढ़, खरवा सहित कई पौधशाला में इस बार मानसून की बेरूखी के कारण वितरण से ज्यादा पौधे बच गए है। पानी के अभाव में बचे पौधों तथा नए पौधे तैयार करने को लेकर वन विभाग के सामने चुनौती होगी। इतना ही नहीं इस बार नर्सरी में यूपी से आए पौधे भी वितरण के अभाव में आधे पौधों ने दम तोड़ दिया है। नर्सरी के तीनों जल स्त्रोतों में पानी नहीं है। ऐसे में गर्मी में बचे पौधों को बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी होगी।
वितरण से ज्यादा बच गए
खरवा नर्सरी में मानसून में वितरण के लिए 98 हजार 966 पौधे तैयार थे। इसी तरह अजमेर में भी एक लाख से ज्यादा पौधे तैयार किए गए। पुष्कर, ब्यावर में भी करीब 90-90 हजार पौधे तैयार हुए। इसमें भी प्रत्येक नर्सरी से दस से चालीस हजार पौधों का वितरण ही हो पाया। तकरीबन सभी नर्सरी में 40 से पचास हजार पौधे तो बच गए। वन विभाग बचे पौधों की सार संभाल में लगा हुआ है।
योजना के थे पौधे
नर्सरी में वन विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के लिए पौधे तैयार किए थे। बारिश के अभाव में सरकार स्वयं पौधरोपण नहीं कर पाई। इससे नर्सरी में अभी तक बड़ी संख्या में पौधे बचे हैं। नर्सरी में केम्पा योजना के 50 हजार, आरएफबीपी योजना के 20 हजार, नाबार्ड योजना के 10 हजार व अन्य वितरण के लिए 10 हजार पौधे तैयार किए थे।
यूपी के पौधे सूखे
खरवा नर्सरी के लिए इस बार विशेष अभियान के तहत 2 हजार 62 अच्छी नस्ल के यूपी से पौधे आए थे। बारिश के अभाव में पौधे लगाए नहीं जा सके ना ही वितरण हो पाए। इनमें से एक हजार पौधे पानी व वातावरण के कारण सूख गए। यूपी से एक साल बड़े शीशम, नीम, चमेली, मालश्री, कचनार, कदम, अर्जुन, नीम, बिलपत्र, पीपल, गूलर व बड़ आदि के पौधे आए थे।
पानी कहां से आएगा
अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, पुष्कर खरवा नर्सरी में यूपी व नर्सरी के करीब एक लाख से अधिक पौधे पड़े हैं। नर्सरियों में पानी के लिए बोरवेल अथवा बीसलपुर लाइन ही जल स्त्रोत है। इसमें से कई बोरवेल तो किसी काम के नहीं है। कुछ कुओं में भीअब पानी नाम मात्र का ही है। ऐसे में वन विभाग को नए पौधे तैयार करना तो दूर अभी तक रखे हजारों पौधों के लिए पानी की व्यवस्था करना ही चुनौती रहेगा। इतना बजट भी नहीं आता कि पौधों को बाहर से पानी मंगा कर पिलाया जाए।
नर्सरी में बचे पौधों की सार संभाल अच्छे से की जा रही है। पानी का अभाव है। इसके लिए उच्च अधिकारियों से मार्ग दर्शन लिया जा रहा है। कोई ना कोई समाधान जरूर निकलेगा। नए पौधे भी तैयार करने की तैयारी है।
अशरफ काठात, वनपाल नाका, खरवा।





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