बांदीकुई. क्षेत्र के किसानों ने दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस हाइवे के लिए आवप्त की जाने वाली भूमि का उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर सोमवार को एसडीओ कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर उपखण्ड अधिकारी पिंकी मीणा को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने बताया कि दिल्ली से मुम्बई के लिए नेशनल हाइवे-8 पूर्ण रूप से 6 लाइन का विकसित नहीं हुआ है। वहीं एक अन्य परियोजना दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रियल कोरिडोर का कार्य भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में यह परियोजना प्रस्तावित किया जाना किसानों के हित में नहीं है। जबकि राज्य में दो ओर ऐसी परियोजना प्रस्तावित हैं। उनका भी मुख्य उददेश्य दिल्ली से मुम्बई को सीधा जोडऩा है।
किसानों ने बताया कि बसवा तहसील के ग्रामों में इसके अलाइनमेंट को पूर्व दिशा की ओर घुमाव देकर निर्धारित किया गया है। लाइनमेंट में भारी संख्या में आवासीय परिसर/भवनों को नुकसान हो रहा है। क्षेत्र पानी की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन इस योजना से लाखों वृक्ष एवं आवासीय मकान खत्म हो जाने से क्षेत्र में रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
परियोजना का नियोजन 15 फीट ऊंचाई पर रखा गया है। जो फेंसिंग युक्त रहने से आवप्ति से शेष बची भूमि पर रोड पार गमन बाधित होने से कृषि कार्य भी बाधित होने के साथ दो क्षेत्रों में बंट जाएगा। ऐसे में परियोजना का नियमन एलीवेटेड किया जाए या फिर 100 मीटर पर पारगमन सुविधा (अण्डरपास) बनाया जाए। किसानों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की डीएलसी बहुत कम है। सरकार द्वारा निर्धारित डीएलसी के आधार पर नवीन भूमि आवप्ति अधिनियम 2013 एवं सरकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार मुआवजे का फलन करने पर जो राशि बनती है। वह भी भूमि के वास्तविक मूल्य से कम है। ऐसे में मुआवजा राशि के बदले भूमि देने के लिए सहमत नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि आवप्त की जाने वाली भूमि प्रचलित डीएलसी के 20 गुना मुआवजा राशि दी जाए या फिर उसी ग्राम में आवप्त होने वाली भूमि के बराबर भूमि आवंटित की जाए। जिन जगहों पर भूमि का उपयोग आवासीय एवं वाणिज्यिक भी किया जा रहा है, ऐसे में भूमि के उपयोग के अनुसार मुआवजा दिया जाए।
किसानों ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आमजन को साथ लेकर आन्दोलन पर उतारू होना पड़ेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में गंगासहाय भेदाड़ी, भौंरीलाल, मुथरेश कुमार, रत्तीराम पापड़ाकी, कन्हैयालाल, महेशचंद गर्ग, मानसिंह, रामधन छाबड़ी, महेन्द्र कुमार, मोहरसिंह, सरदारसिंह, रामखिलाड़ी, मोतीलाल, प्रभूदयाल, नाथूलाल, रामेश्वरप्रसाद, कानाराम, सुमेरसिंह, गुलाबसिंह आदि मौजूद थे।





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