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पेयजल सप्लाई ज्यादा फिर भी शहर प्यासा

सीकर.

शहर में जलदाय विभाग के दावों के अनुसार जरूरत से अधिक पेयजल सप्लाई हो रहा है। लेकिन शहर के कई इलाकों में गर्मियों में ही नहीं बल्कि सर्दी में भी पेयजल की किल्लत बढ़ रही है। क्योंकि सप्लाई के समय मोटर चलती हैं। इससे सप्लाई पोइंट के आस-पास वाले इलाकों में दोहन और दूरस्थ स्थानों पर रहने वाले लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अगर पेयजल सप्लाई देते समय पहले आधे घंटे बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाए, तो समाधान हो सकता है। लेकिन जलदाय विभाग और बिजली निगम के बीच आपसी तालमेल नहीं होने के चलते यह प्रक्रिया सुचारू रूप से लागू नहीं हो पा रही है। अन्य जिलों को इस प्रक्रिया से पेयजल समस्या में काफी हद तक निजात मिली है।
सप्लाई पर विभाग का नहीं नियंत्रण
प्रति व्यक्ति 135 लीटर पेयजल की आवश्यकता है। शहर की कुल आबादी 2 लाख 76 हजार है। आबादी के अनुसार 3 करोड़ 72 लाख 60 हजार लीटर पेयजल सप्लाई की आवश्यकता है। इससे ज्यादा पेयजल सप्लाई हो रहा है, लेकिन पूर्ति नहीं हो रही है। इसमें एक कारण यह भी है कि वार्डों में सप्लाई खोलने वाले कर्मचारी किसी को भी यह जिम्मेदारी देकर फ्री हो जाते हैं। स्थानिय लोग अपनी मनमर्जी से सप्लाई खोलते हैं। सप्लाई का समय एक घंटे का है। लेकिन लोग अपनी मर्जी से कभी ट्यूबवैल चलाकर सप्लाई खोल देते है।
विभाग के पास अवैध का नहीं कोई हिसाब
शहर में स्थित 50 वार्डों में जलदाय विभाग के 30 हजार कनेक्शनों पर 38 एमएलडी (380 लाख लीटर) पेयजल सप्लाई दी जा रही है। शहर में वर्ष 2018 में कुल 1069 नए पेयजल कनेक्शन हुए। लेकिन विभाग के पास अवैध ट्यूबवैल व नल कनेक्शनों का कोई पुख्ता हिसाब नहीं है। इन्हीं अवैध कनेक्शनों के चलते विभाग के 6820 पेयजल कनेक्शन बंद (डीसी) हो गए। पिछले साल विभाग ने जुलाई से सितंबर तक अभियान चलाकर मात्र 38 अवैध कनेक्शन मिले। इनमें से 10 अवैध कनेक्शन रेगुलाइज हो गए।
शहर में ट्यूबवैल सप्लाई पर एक नजर
जलदाय विभाग की ओर से शहर की पेयजल सप्लाई में कुल 260 ट्यूबवैल चल रहे हैं। इनमें से 135 ट्यूबवैल पंप हाउस व 125 सीधे कॉलोनियों में सप्लाई दे रहे हैं। इनमें सात ट्यूबवैल भू- जल स्तर नीचे होने के चलते पिछले साल विभाग ने गहरे किए थे। शहर में अमृत योजना के तहत कुल 25 ट्यूबवैल सेंक्शन हुए।

 



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