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यहां करोड़ों खर्च के बाद भी नसीब नहीं हो रहा आरओ से पानी


खुशालसिंह भाटी
जालोर. फ्लोराइड के दंश को झेल रहे जालोर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने की मंशा से सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर आरओ लगाए गए थे, इन आरओ से कुछ समय तक शुद्ध पानी मिला, जिसके बाद एजेंसी की ओर से इनकी मरम्मत नहीं करने और विभागीय मॉनिटरिंग के अभाव में अब इनमें से आधे से ज्यादा आरओ बंद है। ऐसे में फिर से ग्रामीणों को फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में कुल 3 फेज में आरओ स्वीकृत हुए थे। पहले फेज में वर्ष 2014-15 में आरओ लगाए गए थे। यह काम सिकंदराबाद की एजेंसी ने किया था। लेकिन पिछले बाढ़ के बाद देवड़ा में एक आरओ बह गया था। जिसके बाद कुल 39 आरओ पहले फेज में बचे, जिसमें से फिलहाल 35 आरओ बंद पड़े हैं और केवल दासपा, रंगाला, जुंजाणी और नरता में ही आरओ शुरू हैं।
ढिलाई का खामियाजा एजेंसी बदली
फेज-3 में 89 आरओ लगने थे। पहले स्तर पर इसके लिए दिल्ली की एजेंसी काम कर रही थी, जिसका काम काफी धीरे था। नोटिस के बाद भी काम ढंग से नहीं करने से इसे भी ब्लेक लिस्टेड किया गया। अब जयपुर की एजेंसी इस फेज में काम कर रही है। इसके लिए 29 सितंबर 2018 को वर्कऑर्डर हुए हैं, लेकिन अब तक 89 में से मात्र 12 आरओ शुरू हुए हैं।
फेज 3 में ये शुरू हुए आरओ
एजेंसी ने मेडा उपरला, देचू, नागणी, नून, बादनवाड़ी, जीवाणा, वोढा, विरोल छोटी, विरोल बड़ी, तावीदर, लाखावास और सांवलावास में आरओ लगा दिए हैं।
आचार संहिता आड़े आई
फेज तीन में प्रोजेक्ट पर काम के लिए सितंबर माह में वर्कऑर्डर हुए, लेकिन उसके बाद एजेंसी की तरफ से ढिलाई बरती गई। लिहाजा चार माह से काम अटका रहा। बीच में आचार संहिता के चलते भी काम में ढिलाई रही। अब एजेंसी ने फिर से काम शुरू किया है। कार्यकारी एजेंसी का कहना है कि अब तक 89 में से १२ आरओ फिर से शुरू किए जा चुके हैं और शेष के लिए सिविल वर्क चल रहा है और जल्द से जल्द इन पर काम पूरा कर दिया जाएगा।
यों समझें असर
जालोर में फ्लोराइड मुख्य समस्या है। ग्रामीण क्षेत्र में फ्लोराइड के साथ साथ पानी में खारापन भी है। जिसे पीने से अनेक बीमारियां उत्पन्न होती है। सरकार की पॉलिसी के तहत गांव गांव आरओ लगाए गए तो ग्रामीणों को शुद्ध पानी मिलने लगा, लेकिन एजेंसी पर लगाम और मॉनिटरिंग के अभाव में पूर्व में लगे अधिकतर आरओ बंद ही पड़े हैं। मजबूरी में टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है।
रिस्क एंड कोस्ट पर मिला
पूर्व में जिन एजेंसी काम कर रही है, वह ब्लेक लिस्टेड होने के बाद हमें रिस्क एंड कोस्ट पर यह काम मिला है। फेज तीन के तहत हमारी एजेंसी को कुल 89 आरओ का काम करना है।
गजेंद्र अग्रवाल, जीए, इंफ्रा प्रा.लि, जयपुर
पैकेज 3 के लिए एजेंसी काम कर रही है। इसको यह काम एक साल में करना है। बीच में आचारसंहिता से काम बंद था। पैकेज एक में काफी आरओ बंद पड़े है।
- ताराचंद कुलदीप, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग, जालोर



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