सरिस्का में बाघों का कुनबा बढ़ रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा करने वाले कर्मचारियों की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। वैसे तो सरकार की ओर से यहां मुख्य वन संरक्षक से लेकर बीट गार्ड तक ढेरों पद स्वीकृत हैं, लेकिन स्थिति यह है कि न तो यहां उपवन संरक्षक पर्याप्त संख्या में हैं और न ही गार्ड।
एक बाघ की मॉनिटरिंग को चार वन गार्ड जरूरी
नियमों के मुताबिक एक बाघ की मॉनिटरिंग के लिए वन गार्ड जरूरी हैं। इस लिहाज से सरिस्का में मौजूद 11 बाघ-बाघिनों के लिए 44 वन गार्ड की जरूरत है। सरिस्का में वर्तमान में 98 गार्ड हैं, यदि इनमें से 44 वन गार्ड को केवल बाघों की मॉनिटरिंग पर लगा दिया जाए तो 54 वन गार्ड ही सरिस्क की सुरक्षा को बचते हैं। इन 98 वन गार्ड में करीब 40 से ज्यादा महिला वन गार्ड हैं, जिनमें से कुछ ही फील्ड की डयूटी पर हैं, शेष कार्यालय में वायरलैस सिस्टम व अन्य कार्य के लिए नियुक्त हैं।
गांवों के विस्थापन का कार्य अटका
सरिस्का में बाघों को बचाने के लिए गांवों का विस्थापन जरूरी है। इस कार्य को गति देने के लिए पूर्व में यहां एक डीएफओ को अलग से लगाया गया था, लेकिन विस्थापन का कार्य आगे नहीं बढ़ सका। वर्तमान में भी सरिस्का में विस्थापन कार्य को गति देने के लिए डीएफओ की नियुक्ति नहीं है। यही कारण है कि गत एक साल से भी ज्यादा समय से सरिस्का में एक भी गांव का विस्थापन नहीं हो पाया है।
यह है सरिस्का में स्टाफ की स्थिति
सरिस्का में डीएफओ के दो पद स्वीकृत हैं, इनमें से एक पद खाली है, वहीं वनपाल के 21 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 11 पद खाली हैं। सहायक वनपाल के 23 स्वीकृत पदों में 12 खाली हैं। इसी तरह वन गार्ड के 139 पदों में से 41 खाली हैं। इसी तरह कई पद भी लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं।
स्टाफ की कमी से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया
सरिस्का में स्वीकृत विभिन्न पदों में से ज्यादातर लंबे समय से खाली चल रहे हैं। स्टाफ की कमी की समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। वहीं वन मंत्री को भी पिछले दिनों ही सरिस्का दौरे में जानकारी दी गई है।
हेमंत सिंह
डीएफओ सरिस्का बाघ परियोजना





No comments:
Post a Comment