सीकर।
आज हम आपको एक ऐसे चिडिय़ा प्रेमी से मिलाते है जिनका एक शौक कैसे जुनून में बदल गया। ये चिडिय़ा प्रेम राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर में देखने को मिला है। यहां फतेहपुर के गहनिया मंदिर के पुजारी परिवार का चिडिय़ा प्रेम खासी चर्चा में है। वजह है एक शौक जो अब जुनून बन चुका है। शौक के तौर पर करीब 30 साल पहले यह परिवार चिडिय़ा के चार जोड़े लेकर आया था, जो बाद में ऐसा जुनून बना कि आज मंदिर चार हजार से ज्यादा चिडिय़ाओं का घर बन गया है। वो भी तब जब 5 हजार से ज्यादा चिडिय़ा तो मंदिर पहुंचने वाले लोगों को अब तक भेंट की जा चुकी है। आलम यह है कि बहुत से लोग तो मंदिर में इन चिडिय़ाओं को देखने और उनकी चहचहाट सुनने ही मंदिर परिसर में जाने लगे हैं।
मंदिर में चिडिय़ाओं की दिनचर्या का लाइट पर निर्भर होना भी काफी रौचक है। पुजारी रवि पंडित बताते हैं कि चिडिय़ा दिनभर चहचहाती है। लेकिन, रात को जैसे ही मंदिर की लाइट बंद की जाती है, वैसे ही उनकी चहचहाट बंद हो जाती है और अगले दिन सुबह जैसे ही लाइट जलती है, वैसे ही चिडिय़ाएं भी उठकर चहचहाट शुरू कर देती है। रवि पंडित ने बताया कि उनके पिताजी यह चिडिय़ा लेकर आये थे उसके बाद लगातार परिवार के सदस्य उनका पालन पोषण करते हैं। यह भी बतादें कि पुजारी परिवार की ओर से पाली जा सभी चिडिय़ा विदेशी नस्ल की हैं। पुजारी परिवार की ओर से पाली जा चिडिय़ा विदेशी नस्ल की है। इस तरह की चिडिय़ां अक्सर नहीं देखने को मिलती है। ऐसे में इनकी सुदंरता देखते ही बनती है।
चार से चार हजार चीडिय़ा
पुजारी का कहना है कि करीब 30 साल पहले उनके पिताजी विदेश से चिडिय़ां लेकर आये थे। इसके बाद परिवार ने इनका लगातार उनका पालन पोषण किया। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। इस वक्त मंदिर में चार हजार से ज्यादा चिडिय़ां है।





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