सीकर.
कक्षा आठ तक के बच्चों को मिड डे मिल में मिलना वाला दूध दूर होता नजर आ रहा है। कारण मिड डे मिल के बजट पर ब्रेक लगना है। मिड डे मिल में दिसंबर महीने का बजट अभी तक जारी नहीं हुआ। संस्था प्रधानों के लिए डेयरी संचालकों को एक महीने से ज्यादा रोकना मुश्किल हो रहा है। अपने स्तर पर दूध के बिलों का भुगतान कर कब तक इस व्यवस्था को बनाकर रख पाएंगें।
दो महीने से जारी बजट भी अधूरा
स्कूलों में पीएस तक के बच्चों को 100 और यूपीएस में 200 मिली लीटर दूध दिया जाता है। इस दूध की सप्लाई गांवों में किसी भी डेयरी से और शहरों में सरस डेयरी से हो रही है। लेकिन जब से स्कूलों में बच्चों को दूध मिलना शुरू हुआ है। तब से राज्य सरकार से मिलने वाले इस बजट की सुचारू व्यवस्था नहीं हुई। दो महीने से जारी होने वाला बजट भी पूरा नहीं होता हैं।
कुक कम हेल्परों का भी वेतन अटका
राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय फतेहपुर में 120 बच्चों का नामांकन है। पोषाहार प्रभारी बजरंग लाल महर्षि ने बताया कि 15 से 16 लीटर दूध बच्चों में वितरित होता है। डेयरी का हर महीने आठ से दस हजार रुपए तक का बिल हो जाता है। जिले के कई प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को दूध तो दूर दोपहर के भोजन के लिए भी बजट समय पर जारी नहीं होता है। दूध और मिड-डे मिल का पोषाहार तो दूर तीन से चार महीने तक कूक कम हेल्परों को वेतन तक नहीं मिलता है। 1320 रुपए का मानदेय भी समय पर नहीं मिलना उन परिवारों के लिए कितना दुख दाई होगा।





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