श्रीगंगानगर।
प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा का कहना है कि शिक्षकों के बाबूगिरी की प्रक्रिया से सरकारी स्कूलों में अध्यापन प्रभावित हुआ है। अब ऐसा नहीं हो, इसके लिए कवायद शुरू की जा रही है। खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी अब जल्द शुरू हो जाएगी।
लंबे समय से जिला परिषद, कलक्ट्रेट या पंचायत समिति या अन्य सरकारी विभागों में प्रतिनियुक्ति की आड़ में बाबूगिरी या अफसरगिरी करने वाले शिक्षकों की पहचान की जाएगी। स्कूलों में पढ़ाई किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होने देंगे। इसके लिए बकायदा प्रत्येक विभाग से एक एक शिक्षक की सूची जुटाकर उनको वापस स्कूल भिजवाने की कवायद शुरू की जाएगी, इसके लिए शिक्षा अधिकारियों केा अधिकृत किया है।
शिक्षा मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री डोटासरा ने बताया कि प्रतिनियुक्ति की आड़ में चुनाव कार्य या अन्य सरकारी कामकाज में डयूटी करने वाले शिक्षकों की अब सूची बनाकर वापस स्कूलों में भिजवाया जाएगा। ऐसे शिक्षकों का वेतन स्कूलों से उठ रहा है लेकिन डयूटी अन्य सरकारी विभागों में दी जा रही है।
शिक्षा मंत्री का कहना था कि प्रदेश में गहलोत की अगुवाई में सरकार ने यह प्राथमिक स्तर पर निर्णय लिया है कि पूर्व में जवाबदेही कानून लागू किया था, वह अब फिर से लागू किया जा चुका है। केबीनेट ने निर्णय भी कर दिया है। ऐसे में जनता को तय समय में जवाब देने का प्रयास किया जा रहा है। जनता की अपेक्षाओं के अनुरुप जनप्रतिनिधियों के साथ साथ अफसरों को भी जवाब देना होगा।
शिक्षा र्मंत्री ने दावा किया कि उनकी प्राथमिकता यह है कि किसी भी सरकारी स्कूल में शिक्षकों के पद खाली नहीं रहे, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई प्रभावित हो रही है या होने वाली है। ऐसे में शिक्षा अधिकारियों को खाली पदों की सूची के अनुुरप पद भरने की कवायद की जाएगी। इसके लिए उन्होंने अपने विभाग के उच्च अधिकारियों को इस संबंध में आदेश की पालना कराने के लिए कहा है। इसके साथ साथ ऐतिहासिक महान पुरुषों और पूर्व प्रधानमंत्रियों की जीवनी के बारे में पाठयक्रम में छेड़छाड़ के संबंध में पिछली सरकार के आदेशों की समीक्षा कर वापस दुरुस्त कराने का प्रयास किया जा रहा है।
जिले में कई ऐसे शिक्षक है जो लंबे समय से जिला परिषद, पंचायत समिति, कलक्ट्रेट सहित कई विभागों में डयूटी कर रहे है। लेकिन वेतन स्कूलों से उठ रहा है। संबंधित स्कूलों में अध्यापन के लिए इन शिक्षकों को सरकारी सेवा में लिया गया था लेकिन राजनीतिक एप्रोच होने के कारण इन शिक्षकों ने स्कूलों की बजाय जिला मुख्यालय या अपने गृह क्षेत्र के सरकारी विभाग में प्रतिनियुक्तियां करवाकर निहाल हो गए है।





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