इओ नियम का हवाला देती रहीं, एक्सइएन ने डलवा दी लाइन
चिड़ावा. शहर की झुंझुनंू रोड पर चिंकारा कैंटिंन के पास गली में विवाद के चलते सीवरेज लाइन डालने में हो रही परेशानी के कारण बुधवार को उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने समझाइस कर लाइन डलवाने का कार्य शुरू करवाया। हालांकि इओ ने नियमों का हवाला देते हुए लाइन को रास्ते के बीच से डालने की बात कही। मगर एक्सइएन(सीवरेज)ने इओ की बात नहीं मानते हुए रास्ते के साइड से लाइन डलवा दी। मामले के अनुसार कैंटिंन की गली में लंबे समय से रास्ते का विवाद चल रहा है। यहां के बलवीर फोगाट व उनके घरवालों का कहना है कि उनके पास नगरपालिका का जो पट्टा है, उसके मुताबिक पट्टे में भूखंड की लंबाई 98 फीट है। ऐसे में जहां दूरी पूरी होती है, वहीं से लाइन डाली जाए। उधर, पालिका का कहना है कि ले-आउट प्लान में प्लॉट के पास से 14 फीट का रास्ता दिखाया गया है। ऐसे में रास्ता जरूरी है। अगर पट्टे के अनुसार नपती की जाए तो प्लॉट की 98 फीट की दूरी पूरी होने के बाद महज चार-पांच फीट का रास्ता बचता है। ऐसे में रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। मामला उच्चाकारियों के पास पहुंचा। जिस पर नायब तहसीलदार जगदीशराम बिश्नोई, एक्सइएन (सीवरेज) अशोक जांगिड़, नगरपालिका इओ अनीता खीचड़, सीवरेज जेइएन सरोज भाटिया, नपा जेइएन रमेश चौधरी, हैड कास्टेबल प्रहलाद सिंह मौके पर पहुंचे। एक्सइएन जांगिड़ ने मामले की जानकारी ली। उन्होंने रास्ते के बीच के बजाए साइड से लाइन डलवानी शुरू कर दी। जिस पर इओ खीचड़ ने नियमों का हवाला देते हुए लाइन रास्ते के बीचों-बीच डालने की बात कही। मगर एक्सइएन ने रास्ते के एक तरफ से लाइन डलवाने का कार्य शुरू करवा दिया। रास्ते के बीच में पेड़ आने के बाद लाइन में मोड़ भी दिया गया। इस दौरान करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारी मौके पर रहे।
न्याय की मांग को लेकर क्रमिश अनशन जारी
झुंझुनूं. सिपाही अखिलेश की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर परिजन व रिश्तेदारों का बुधवार को क्रमिक अनशन तीसरे दिन जारी रहा। अनशन पर बैठे लोगों का आरोप है कि पुलिस ने मामले को कमजोर कर व आरोपितों को बचाने की नीयत से कमजोर धाराओं में गिरफ्तारी दिखाई। मामले में सभी आरोपितों की गिरफ्तारी भी नहीं हुई। इधर, विभिन्न संगठनों ने अनशन को समर्थन दिया। दिया। धरना स्थल पर महिराम, सुभाष, अमीर सिंह मील, वीरेंद्र महला, महेश, मां दयाकोर, संतोष, सारती, अनिता, मंजू आदि मौजूद रहे।






No comments:
Post a Comment