श्रीगंगानगर। एक ही दिन में मिर्जेवाला रोड पर स्थित नंदीशाला में तीन और पशुओं ने अपना दम तोड़ दिया। इसके अलावा तीन पशु गंभीर बीमार है। इस नंदीशाला में गत महीने तीन दिन में एक साथ बारह पशुओं की मौत का मामला उजागर होने के उपरांत जिला कलक्टर ने जांच कमेटी गठित की थी। यह जांच की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई कि पशुओं के मरने का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है।
इस नंदीशाला में करीब साढ़े पांच सौ पशुओं पर सार संभाल के लिए परिषद ने पुख्ता इंतजाम नहीं किए है। इस कारण पशुओं के रखरखाव के लिए नियमित सफाई सहित अन्य सुविधा नहीं मिल रही है। इन मृत पशुओ से नगर परिषद महकमे में खलबली मच गई है। मृत पशुओं के उठाव की व्यवस्था नगर परिषद ने की है।
परिषद के राजस्व अधिकारी और नंदीशाला प्रभारी जुबेर खान ने बताया कि मृत पाए गए पशुओं को बाहर भिजवाया गया है। वहीं बीमार पशुओ को सुखाडिय़ा सर्किल श्रीगौशाला में भिजवाने की व्यवस्था की गई है। रविवार को इस नंदीशाला में घुटने तक गोबर और पानी से पशुओं के बाड़े में दलदल बनी हुई थी। गेट से लेकर खुरली तक पूरा कैम्पस खराब नजर आया।
हालांकि वहां पशुओं के चारे के लिए प्राइवेट कर्मचारी सेवादार के रूप में लगे हुए थे। लेकिन बड़े पशुओं के साथ बछड़े एक साथ रखने से भी व्यवस्था प्रभावित नजर आई। इन बछड़ों को अलग से बाड़े में रखने की व्यवस्था नहीं थी। वहीं बीमार पशुओं को भी चिह्नित नहीं किया गया था, इस कारण बीमार पशु दम तोडऩे को मजबूर हो रहे है। यहां तक कि नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी भी तब ही आते है जब कोई वीआईपी या प्रशासनिक अधिकारी जांच करने के लिए आते है।
इस बीच खुद ट्रेक्टर की ड्राइविंग कर कराहे से गोबर के ढेर और दलदल बन चुकी मिट्टी को पलटकर समतल करने के लिए बिना रुके लगातार चार घंटे कड़ी मेहनत। माथे पर पसीना आया तो मुस्कारते हुए अपने साथियों को श्रमदान की बार बार प्रेरित करने का प्रयास। रविवार को शहर से करीब दस किमी दूर स्थित मिर्जेवाला रोड पर स्थित नंदीशाला में ऐसा ही नजारा था।
पार्षद डा.भरतपाल मय्यर अपने सहयोगी और मित्र मंडली के साथ श्रमदान करने के लिए रविवार को सुबह नौ बजे इस नंदीशाला में पहुंच गए और वहां तीन ट्रेक्टरों की मदद से साठ ट्रॉली गोबर और दलदल बन चुकी मिट्टी व कचरा निकाला। इस नंदीशाला के मुख्य गेट से पशुओं के पानी पीने के लिए खुरली तक पहुंचने में मुश्किल हो रही थी।
गोबर और मूत्र लगातार वहां होने के कारण मिट़टी कीचड़ का रूप ले चुकी थी। इस कडकड़़ाती ठंड में यह पूरा बाडा दलदल से लबालब हो गया था, ऐसे में इस टीम ने बिना किसी प्रचार किए वहां सफाई का अभियान शुरू किया।
ट्रेक्टरों की मदद से दो जगह गोबर के ढेर लगा दिए। दलदल को साफ करने के लिए इस ग्यारह सदस्यीय टीम को अधिक परेशानी आई लेकिन गौवंश की सेवा करने में इन सेवादारों का जुनून था। चार घंटे के बाद दो बाड़े साफ हो चुके थे।
इस नंदीशाला में जहां पशुओं की बाड़ेबंदी कर रखी है, वह किसी जेल से कम नहीं है। यातनाएं कोई दे नहीं रहा लेकिन मिल जरूर रही है। आसमान से रात को खुले में ठंड अधिक रहती है, वहीं जमीन पर गोबर और मूत्र से दलदल का रूप ले चुका है। ऐसे में वहां पशुओं के बैठने की व्यवस्था तक नहीं है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस नंदीशाला में पशुओं के बाड़े में जाता है तो पशु अपना दर्द बयां करने के लिए आते है।
आंखों में उम्मीद की राह के बावजूद पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है। हालांकि हरे चारे की कमी नहीं है लेकिन सेवादारों की कमी इस नंदीशाला में जरूर खल रही है।
इस नंदीशाला में ठंड के कारण पशुओं की लगतार मौतों के कारण यह मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है।
इस बीच पार्षद मय्यर का आरोप है कि इस नंदीशाला में व्यवस्था बिगाडऩे के जिम्मेदार सभापति के शह पर हो रहा है। इस नंदीशाला में पिछले डेढ़ साल से पशुओं के गोबर की खाद कई सैंकड़ों ट्रॉलियों का हिसाब किताब तक नहीं है। सफाई और चारे की व्यवस्था में बरती गई अनियमितता बरतने के लिए नंदीशाला प्रभारी लेखाकार मदनलाल डूडी अकेला जिम्मेदार नहीं है।
डूडी को शह सभापति से मिल रही थी। ठेकेदारों को मनमर्जी से चारे की खरीद कराइ्र जा रही है। यहां तक कि मृत पशुओं के निस्तारण के लिए ठेका तक नहीं है। सेवादार जो रखे गए है वे ऊंचती रूप से है। इसके अलावा नंदीशाला में निर्माण कार्यो और वहां पशुओं के नाम पर चंदे का हिसाब किताब भी नहीं है।
मय्यर का कहना है कि कलक्टर ने नंदीशाला में रखे गए पशुओं को अन्य गौशालाअेां में शिफ्ट करने का तुगलगी फरमान जारी कर दिया है जबकि व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी होनी चाहिए थी। दोषी अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे।
इधर, सभापति अजय चांडक ने मय्यर सहित अन्य पार्षदों और संगठनों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है। चांडक का कहना है कि भाजपाई पिछले चार सालों से लगातार झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि बिगाडऩे की साजिश की जा रही है। अब तक एक भी आरोप साबित नहीं हो पाया है।
सभापति का कहना था कि नंदीशाला में व्यवस्था करना आयुक्त का काम है न कि उनका। वे तो खुद कई बार शिकायत कर चुके है कि कई कार्मिक और अधिकारी अपनी मनमर्जी से डयूटी के नाम पर खानापूर्ति कर रहे है, ऐसे में सुधार कैसे होगा। भाजपा के राज में कई बार चैकिंग तक कर चुका हूं लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।





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