सीकर/शिश्यू.
जब तक शरीर ने साथ दिया तब तक आश्रितों के आंच भी नही आने दी और उम्र के जिस पड़ाव में अपने मददगार होते है उस वक्त अपनों के सितम से बेघर हुए शख्स की पीड़ा कोई भुगतभोगी ही महसूस कर सकता है। सीकर के रानोली स्टेशन रोड़ निवासी बनवारी लाल मोदी अपनी जीवनी मंदिर में काटने को मजबूर हैै। मकान व भूमि में एक चौथाई हिस्सा होने के बावजूद हाडक़ंपाने वाली ठंड में वह शिव मंदिर की शरण लेकर खुले आसमां तले एकाकी जीवन जी रहे है। वह करीब 20 माह से मंदिर बसेरा कर रहा है। सुबह शाम की रोटी का जुगाड़ भी मंदिर आने वालों द्वारा ही किया जाता है। ऐसे में 80 वर्षीय बनवारी लाल मोदी के सामने आशियाने के साथ दो जून की रोटी के लाले भी पड़ गए है। मोदी का आरोप है कि उसके पास काफ ी भू-संपत्ति है। जब तक उस पर अधिकार था तब तक उच्छी परवरिश हुई किन्तु उसे हड़पने के बाद उसे बेघर कर दिया। अब मंदिर में शिव परिवार की छत्र-छाया में जीवन के शेष दिन बिता रहा है। हर प्रकार से अक्षम मोदी ने पत्रिका के माध्यम से सरकार से रोटी, कपड़ा व मकान के लिए न्याय की मांग की है।
अपने खर्चे से बनाया शिव मंदिर
पीडि़त बनवारी के अन्य तीन भाई और है। वह और उसका छोटा भाई झाबर मोदी अविवाहित है। दोनों ही हाथ पैरों से दिव्यांग भी है। खुद का कार्य करने में भी बेबस है। बनवारी अपने तीसरे भाई के व झाबर चौथे भाई के साथ रहता है। पारिवारिक क्लेश के कारण बनवारी परेशानियों से जूझ रहा है। उसने अपनी संपत्ति के खुद के भाग से एक शिव मंदिर बनाया । बकौल बनवारी करीब 30लाख की भू संपत्ति बता रहा है किन्तु इस समय दाने -दाने को मोहताज है।





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