सफल नहीं हो पाई पूर्व सरकार की योजना, जिले में नहीं पहुंच रहा माल, बंद हो गए कई भण्डार, टैण्डर हुआ खत्म, माल सप्लाई के डिपो भी बंद
बूंदी. प्रदेश में चल रही अन्नपूर्णा भण्डार की दुकानों पर जल्द ही ताले लग जाएंगे। पूर्व की सरकार की यह योजना सफल नहीं हो पाई है। ऐसे में वर्तमान में योजना मृतप्राय सी हो गई।आमजन को भी इससे ज्यादा कुछ फायदा नहीं हुआ। इस तरह के कई कारणों की वजह से योजना शुरुआत से ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकी। जानकारी के अनुसार बूंदी जिले में अन्नपूर्णा भण्डार की ११० दुकानें शुरू की गई थी। उक्त दुकानें राशन की दुकानों के साथ ही शुरू की गई, ताकि आमजन को किराने का सामान भी उचित मूल्य की दुकानों पर मिल सके। लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में दुकानें बंद हो चुकी है।
सिर्फ कुछ ही दुकानें चल रही है, जिनमें थोड़ा बहुत माल बिक रहा है, लेकिन वह भी आने वाले दिनों में दम तोड़ देगी। ऐसे में संपूर्ण योजना के संचालन पर ही संकट पैदा हो गया है।
ठप हो गई सप्लाई
सूत्रों के अनुसार अन्नपूर्णा भण्डार पर किराना सामग्री सप्लाई करने का राज्य स्तर पर टैण्डर हुआ था। जो कुछ माह पहले खत्म हो गया। इसके बाद दुबारा टैण्डर नहीं किए गए। ऐसे में कोटा संभाग स्तर पर बनाया गया डिपो बंद हो गया है। डिपो बंद होने से बूंदी जिले में अन्नपूर्णा भण्डार पर होने वाली किराना सामग्री की सप्लाई भी बंद हो गई। काफी समय से सप्लाई नहीं होने से भण्डार की दुकानें बंद हो गई है। जो दुकानें चल रही है वह भी जल्द ही बंद होने की आशंका है।
टारगेट भी पूरा नहीं किया
पूर्व की सरकार ने अन्नपूर्णा भण्डार के लिए जिले को १२७ दुकानों का टारगेट दिया था। जल्दबाजी में जिले में ११० दुकानें खोली गई। शेष दुकानें खुलने से पहले ही योजना की पोल खुलकर दुकानदारों के सामने आ गई। ऐसे में नई दुकानें खुलना तो दूर पुरानी दुकानें भी बंद होने लग गई। यही कारण रहा कि टारगेट पूरा नहीं हो पाया।
सामान सप्लाई करने वाले डिपो बंद हो गए हैं। इस कारण माल सप्लाई नहीं हो रहा है। पूरे प्रदेश में यही समस्या है। कई जगह भण्डार चल रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे सब बंद करते जा रहे हैं। हालांकि विभागीय स्तर पर अभी तक इन्हें बंद करने का आदेश नहीं मिला है।
रुचि अग्रवाल, प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम, बूंदी
जो माल भेजा वह एक्सपायरी डेट का था। बाजार से महंगी दर का होने से लोगों ने माल नहीं खरीदा। इससे मुझे काफी नुकसान हुआ। इस कारण एक साल पहले दुकान बंद कर दी। जो माल पड़ा है वह भी वापस नहीं ले रहे हैं। वर्तमान में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
पवनकुमार शर्मा, संचालक अन्नपूर्णा भण्डार





No comments:
Post a Comment