नोखा. राजस्थान विधानसभा सत्र के अंतिम दिन बुधवार को विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने जनहित के दर्जनभर से अधिक मुद्दे जोरदार ढंग से उठाए। उन्होंने किसानों की कर्जमाफी, नकली खाद्य पदार्थों पर अंकुश लगाने, प्रदेश में आर्थिक आरक्षण लागू करने, मोठ का एमएसपी मूल्य तय करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भिजवाने, मूंग खरीद की तारीख बढाने, बेरोजगारी भत्ता लागू करने और स्थानीय व पंचायतीराज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता हटाने को लेकर सदन में बहस की। विधायक बिश्नोई ने कहा कि सत्ता में आई सरकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चुनाव से पहले जनसभाओं में घोषणा की थी, उनकी सरकार बनते ही दस दिन में किसानों का संपूर्ण कर्जा माफ कर दिया जाएगा। जबकि सरकार का गठन हुए एक माह से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी किसानों की कर्जमाफी का कोई पता ही नहीं है। विधायक ने कहा कि संपूर्ण कर्जमाफी की घोषणा करने वाली पार्टी ने सत्ता प्राप्ति के बाद किसानों के दो लाख रुपए तक के ऋण माफी तक सीमित कर दिया, उस पर भी मुख्यमंत्री असमंजस में है। विधायक बिश्नोई ने कहा कि अन्नदाता को धोखा देने वाली पार्टी को किसान लोकसभा चुनाव में जवाब देगा।
ये उठाई मांगें
सदन में विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम २९५ के तहत विधायक बिश्नोई ने नोखा कस्बे में दशकों से रेहड़ी-ठेला लगाकर गुजर-बसर करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स के मुद्दे को लेकर सदन का ध्यान आकर्षित किया। विधायक ने कहा कि नोखा शहर में लगाए जाने वाले रेहड़ी-ठेला वालों पर नगरपालिका प्रशासन कई बार कार्रवाई कर उनको खदेड़ देता है। जिससे परिवार पर आर्थिक संकट आ जाता है। विधायक ने स्ट्रीट वेंडर्स को नोखा में स्थाई जगह आवंटित करने और सूदखोरों से बचाने के लिए के्रडिट कार्ड की सुविधा देने की मांग की। उन्होंने राजस्थानी भाषा को राज्य की दूसरी राजभाषा बनाने के विषय में चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव को लाने की अनुमति चाही, तो सभापति द्वारा अनुमति नहीं दी गई।





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