कोटा. मेडिकल कॉलेज से जुड़े तीन बड़े अस्पतालों में लोकल स्तर पर दवा खरीद में गड़बड़झाले का मामला एसीबी में जा पहुंचा है। पार्षद मोहम्मद हुसैन ने मंगलवार को नयापुरा स्थित एसीबी कार्यालय में शिकायत दी। एडिशनल एसपी एसीबी चंद्रशील ठाकुर को दी लिखित शिकायत में हुसैन ने मामले की जांच, तकनीकी कमेटी व सप्लायर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज से जुड़े तीनों बड़े अस्पतालों में सालभर पहले कॉलेज स्तर पर दवा खरीद का टेंडर होने के बाद भी सप्लायर ने जरुरत की दवा सप्लाई नहीं की। अस्पतालों में टेंडर रेट पर सप्लाई नहीं होने से सरकार को दवा खरीद में करीब डेढ़ करोड़ का फटका लगा है। इतना ही नहीं नए अस्पताल में औषधि नियंत्रण विभाग की कार्रवाई में खुलासा हुआ कि फर्म द्वारा नए अस्पताल में सप्लाई की गई दर्द निवारक जेल का लेबल मिस ब्रांडेड था यानि दवा के रैपर पर तो बेच नम्बर अंकित था, लेकिन अंदर ट्यूब पर बेच नम्बर नहीं था। अंदर डेट व एक्सपायरी भी अंकित नहीं। सप्लाई में दवा का नाम भी सही नहीं है। फर्म ने रिलेक्सल के नाम से दवा व 'बेच रिपोर्टÓ मेडिकल कॉलेज प्रशासन को दी। जबकि फ र्म ने डाइक्लोफि नेक जेल के नाम से बिल पेश किया। सहायक औषधि नियंत्रक देवेन्द गर्ग कि माने तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पूरे मामले में अनदेखी की है। सप्लायर ने डाइक्लोफि नेक जेल का बिल पेश किया और रिलेक्सल दवा सप्लाई की।
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पार्षद मोहम्मद हुसैन ने एसीबी में शिकायत देकर मेडिकल कॉलेज स्तर पर हुए दवा खरीद में गड़बड़झाले की जांच की मांग की है।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने 6 जनवरी को 'टेंडर रेट पर सप्लाई नहीं, दवा खरीद में डेढ़ करोड़ का फटकाÓ और 12 जनवरी को मेडिकल कॉलेज में घटिया दवा खरीद कर रोगियों को बांट दी शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामले को उजागर किया था।





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