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विवाद में उलझा नाथद्वारा आयुर्वेद चिकित्सालय, सरकारी राशि हो रही बर्बाद

अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. विवाद के चलते २ वर्ष पूर्व राशि स्वीकृत होने के बाद भी नाथद्वारा के आयुर्वेद चिकित्सालय का काम पूरा नहीं हो पा रहा, इससे जहां सरकारी धन बर्बाद हो रहा है, वहीं मरीजों को आयुर्वेद चिकित्सालय की सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। विवाद मंदिर मंडल और आयुर्वेद भवन की भूमि को लेकर है। हालही में मंदिर मंडल द्वारा नोटिस देकर काम रूकवा दिया गया है, अब कार्यकारी एजेंसी लोक निर्माण विभाग ने आयुर्वेद विभाग को पत्र लिखकर भूमि का सीमांकन करवाने की बात कही है।


वर्ष 2017 में हुई स्वीकृति
अ श्रेणी के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय निर्माण एवं मरम्मत के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2017 में 61.64 लाख रुपए की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति जारी की तथा निर्माण कार्य का जिम्मा सार्वजनिक निर्माण विभाग को दिया गया, लेकिन कईबार काम शुरू होकर बंद होने तथा कछुवाचाल के चलते अभी मरम्मत व निर्माण तो दूर नींव तक का काम पूरा नहीं हो पाया है।


मंदिर मंडल ने रुकवाया काम
नाथद्वारा मंदिर मंडल के मुख्य निष्पादन अधिकारी ने 5 जनवरी 2019 को मौके पर जाकर निर्माणधीन काम को रोक दिया। उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग को नोटिस जारी करते हुए लिखा कि आयुर्वेद चिकित्सालय के जीर्णोद्धार का नक्शा/प्लान उन्हें उपलब्ध करवाया जाए। वर्तमान मेें चिकित्सालय परिसर की दीवार तोड़कर मंदिर मंडल की भूमि पर अनाधिकृत कार्य किया जा रहा है। इसे तुरंत रोका जाए। साथ ही नक्शा/प्लान तुरंत तत्काल कार्यालय को भिजवाया जाए तथा मौके पर रूकवाए गए कार्य को बंद रखा जाए, मंदिर मंडल की भूमि पर किसी तरह का अतिक्रमण करना पाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोटिस के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग ने काम रोक दिया तथा विभाग के सहायक अभियंता ने चिकित्सा प्रभारी आयुर्वेद विभाग को पत्र लिखकर आयुर्वेद भवन का चिह्निकरण करने को कहा है। ऐसे में प्रश्न यह है कि वर्षों से जहां चिकित्सालय संचालित था क्या उसका अभीतक चिह्निकरण नहीं हुआ, और दो वर्ष काम कहां हो रहा है।


मरीजों को हो रही परेशानी
आयुर्वेद चिकित्सालय का भवन क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्रीय लोगों को आयुर्वेद की सेवाएं लम्बे समय से नहीं मिल पा रही है और मरीज उपचार के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।


इनका कहना है...
वह मंदिर मंडल की दीवार तोड़ रहे थे, इसलिए उन्हें रोका है, हमने चिकित्सालय का काम नहीं रुकवाया।
-जितेंद्र ओझा, मुख्य निष्पादन अधिकारी, मंदिर मंडल नाथद्वारा।

कुछ भूमाफिया अपने निहित स्वार्थों के चलते मंदिर मंडल को गुमराह कर नगर के मध्य में स्थित एकमात्र राजकीय आयुर्वेद चिकित्सलय का पुनॢनमाण नहीं होने देना चाहते हैं, जिससे निर्माण कार्य में रोड़ा अटकाया जा रहा है।
-नीरज शर्मा, एडवोकेट, नाथद्वारा

मंदिर मंडल ने जो भूमि राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय को दान की थी काम उसी में हो रहा है।
-डॉ. ललित उपाध्याय, चिकित्सा प्रभारी, आयुर्वेद चिकित्सालय नाथद्वारा



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