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विधानसभा चुनाव के बाद बदले तेवर, नगर परिषद सभापति ने ऐसा क्या किया कि रोजाना तबादला सूची का इंतजार


श्रीगंगानगर। इलाके में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को मिली हार के बाद नगर परिषद सभापति अजय चांडक एकाएक आक्रमक मूड में आ गए है। चांडक ने अपने अग्रज अशोक चांडक की हार का बदला लेने के लिए उन अधिकारियों और कार्मिकों को एपीओ करवाया है जिन्होने चुनाव के दौरान उनके अनुरुप काम नहीं किया।

चुनाव में आचार संहिता लगने के कारण इन अधिकारियों ने सभापति को टकासा जवाब दे दिया था। जैसे ही आचार संहिता हटी और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो सभापति पावर में आ गए।

उन्होंने एक्सईएन संदीप नागपाल, स्वास्थ्य अधिकारी देवेन्द्र प्रताप सिंह, बड़े बाबू विनोद गर्ग, निर्माण शाखा के सुनील महेन्द्रा के अलावा तीन फायरमैनों को एपीओ करवा दिया है। इस उठापटक के बीच नगर परिषद सचिव लाजपत बिश्नोई ने अपना तबादला श्रीकरणपुर ईओ के पद पर करवा लिया है।

अगली सूची में कई और भी अधिकारी व कार्मिकों के नाम शामिल है। सभापति ने अपने लैटरपेड से सीधे डीएलबी निदेशक पवन कुमार अरोड़ा से शिकायतों का सिलसिला शुरू कर रखा है। इस कारण आयुक्त अशोक असीजा खुद परेशान है। आयुक्त ने तो अब टकराव की बजाय तबादले के लिए उच्चाधिकारियों से मिन्नतें भी निकाली है।
इस बीच नगर परिषद और यूआईटी के कई अधिकारी और कार्मिकों ने अपने स्थानान्तरण को रोकने के लिए अब कांगं्रेसियों की शरण ली है। इन अधिकारियों और कार्मिको ने अगली सूची में तबादला रोकने के संबंध में डीएलबी और यूडीएच में सिफारिशें लगाई है। यही वजह है कि कई अधिकारी लंबे समय से नगर परिषद और यूआईटी में अंगद के पांव की तरह जमे हुए है।

इस कारण कई अधिकारियों और कार्मिको ने अपने अपने परिचितों के माध्यम से विधायकों और कांग्रेस के पदाधिकारियों की मिन्नतें तक निकाली है।
शहर में सफाई और निर्माण कार्यो में लगे अधिकारियों के एकाएक तबादले से नगर परिषद प्रशासन में खलबली मच गई है। यहां तक कि आयुक्त अशोक असीजा की मुश्किलें भी बढऩे लगी है।

नए कलक्टर ने बार बार प्रगति रिपोर्ट मांगकर नगर परिषद प्रशासन को सक्रिय करने का प्रयास किया है लेकिन अधिकारियों के स्थानान्तरण से परिषद प्रशासन की प्रगति रिपोर्ट अटकने के आसार है।

असीजा का कहना है कि सरकार के आदेश की पालना कराई जाएगी। उन्होंने स्वीकारा कि एकाएक तबादले और नए अधिकारियों के आने से कुछ समय के लिए कामकाज पर असर पड़ता है लेकिन नए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेकर नए सिरे से सक्रिय रूप से काम किया जाएगा।



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