भाण्डारेज. जिले में ऐतिहासिक धरोहर व पर्यटन की असीम संभावनाएं के साथ अपनी कला के लिए विख्यात राजपूत मुगल स्थापत्य शैली की तिमंजिली बावड़ी उचित संरक्षण की बांट जोह रही है। जबकि इस और प्रशासन व सरकार का ध्यान केन्द्रित हो तो यह बावड़ी राजस्थान में पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ सकती है, लेकिन देखरेख के अभाव यह ऐतिहासिक धरोहर क्षतिग्रस्त होती जा रही हैं।
उल्लेखनीय हैं कि इस बावड़ी का इतिहास भी काफी पुराना हैं। इस बावड़ी का निर्माण विक्रम संवत 1789 के 1732 ईस्वी में राजपूत मुगल स्थापत्य शैली में पानी की आवश्कता को लेकर कराया गया था, लेकिन उचित देखरेख व संरक्षण के अभाव के कारण यह धरोहर सालों से सूखी हैं, वहीं अब तो जगह-जगह से क्षतिग्रस्त भी होने लगी है।
अनोखी है बनावट
इस बावड़ी का निर्माण विशेष तरीके से किया है। यह कलात्मक आयताकार बावड़ी अष्टकोण युक्त हैं। इसका निर्माण अलंकरण युक्त गुम्बजदार स्तम्भों पर बनाया गया हैं। जिसमें कलात्मक छतरियां बनाई गई हैं। बावड़ी की जो दिवारे बनाई गई, वह अराईयों की है। साथ ही आकर्षक कलशों की बनावट व कंगूरे इस बावड़ी की सुन्दरता पर अमिट छाप छोड़ते हैं। इस पर लगे हुए छज्जे घुमावदार हैं। सीढिय़ों से युक्त इस बावड़ी के चारों ओर पूजा करने व वस्त्र बदलने के लिए कक्ष भी बनाए गए हैं।
बावड़ी के पीछे गोलाकार कुआं बना हुआ है। इतिहास में बताया जाता हैं कि यह बावड़ी उत्तर मध्यकालीन स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके इतिहास के लिए बुजुर्ग आज भी यह बताते हैं कि जिले के आभानेरी जो कि पर्यटन क्षेत्र में आज जिले का महत्वपूर्ण स्थान हैं। जिसकी तरह ही इसकी बनावट व सीढिय़ां अलग ही हैं। ऐसे में इस पर भी पर्यटन विभाग ध्यान दे तो यह भी पर्यटकों को आकर्षित करने की असीम संभावना सजोए हुए हैं।
उल्लेखनीय हैं कि इस बावडी की मरम्मत के लिए करीब सात साल पहले पुरातत्व विभाग द्वारा कार्य कराया गया था, लेकिन इसके बाद उचित देखरेख के अभाव में फिर से यह बावड़़ी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। हालांकि पुरातत्व विभाग ने बावड़ी परिसर के बाहर ही संरक्षित स्मारक व संरक्षित क्षेत्र का बोर्ड लगा रखा हैं।
हाइवे सहित मात्र तीन किमी दूर
प्रदेश में अधिकांश पर्यटक आगरा होते हुए जयपुर जाते हैं। राजमार्ग 21 पर पडऩे वाले भाण्डारेज मोड़ से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर यह बावड़ी स्थित हैं। इसी कस्बे में ऐतिहासिक महल आज हेरिटेज होटल बन चुकी हैं। ऐसे में प्रशासन व सरकार इस पर ध्यान दे तो यह जिले में पर्यटक का मुख्य स्थान ले सकता है।
करेंगे विकास के प्रयास
पुरातत्व व पर्यटन विभाग के माध्यम से इसके विकास के लिए जो भी हो सकेगा, उसके लिए भरसक प्रयास किए जाएंगे।
ममता भूपेश, महिला एंव बाल विकास मंत्री व स्थानीय विधायक
बना सकती है अलग पहचान
ऐतिहासिक बावड़ी अब फिर से क्षतिग्रस्त होने लगी है। ऐेसे में इसकी मरम्मत फिर से करवाई जानी चाहिए। पर्यटन विभाग जैसे आभानेरी में आयोजन कर पर्यटकों को आकर्षित करने की कार्ययोजना तैयार करता है, वैसे यहां भी करें तो जिले में यह बावड़ी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं
रामजीलाल खटीक सरपंच, भाण्डारेज





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