शहर में तीन दर्जन से अधिक बड़े डेथ पॉइन्ट
जयपुर
सड़क हादसे रोकने को प्राथमिकता में बताने वाली पुलिस के सामने डेथ पॉइन्ट पहेली बने हुए हैं। पुलिस के अनुसार शहर में तीन दर्जन से अधिक बड़े डेथ पॉइन्ट बने हुए हैं। पुलिस ने इन जगहों पर सुधार किया तो नए हादसा स्थल सामने आ गए। विश्लेषण में सामने आया कि विश्वकर्मा में चौदह नम्बर पुलिया के पास पहले सड़क हादसे ज्यादा होते थे, पुलिस ने यहां पर बने कट बंद कर दिए। इससे यहां सड़क हादसों में गिरावट आ गई, लेकिन अब धाबास पुलिया के पास सड़क हादसों की संख्या एकाएक बढ़ गई है। इसी तरह से बनीपार्क में चिंकारा कैंटीन से लेकर पानीपेच तक भी सड़क हादसे ज्यादा हो रहे हैं। बगरू महला कट के पास भी एकाएक सड़क हादसों की संख्या बढ़ गई है। यहां पर पहले सड़क हादसे कम होते थे। तारों की कूट के पास कुछ सुधार के बाद सड़क हादसों में कमी आई तो पिंजरापोल गौशाला के पास अचानक कुछ समय से सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ गया है।
नाहरगढ़ रोड पर हालात बेहतर हुए
पुलिस की मानें तो कुछ कदम उठाने के बाद सात नम्बर चौराहा और बालाजी तिराहे पर सड़क हादसों में कमी आई है, चौमूं सर्किल व दौ सौ फीट रोड पर भी हालात बेहतर हुए, मगर पटेल मार्ग, न्यू सांगानेर रोड व वीटी रोड पर दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ गई है। दिल्ली रोड पर पांडा मंडी के पास अचानक सड़क हादसे बढ़ गए हैं, वहीं नाहरगढ़ रोड पर सड़क हादसों में कमी आई है। मानबाग व सडवा मोड़ पर हादसे में ज्यादा होने लगे हैं तो धोबी घाट व गलता गेट के पास कम होने लग गए हंै।
वाहनों की तेज रफ्तार अभी भी चुनौती
तेज रफ्तार शहर में सड़क हादसों की प्रमुख वजह मानी गई है। रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस कई तरह से नए प्रयोग कर रही है, जिनके अच्छे परिणाम भी सामने आने लगे हैं। जेएलएन मार्ग पर लगे सेंसर युक्त कैमरे इसका उदाहरण है। हादसों में मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है।
शहर में सड़क हादसों में गिरा मौत का ग्राफ
2017 की तुलना में 2018 में शहर में सड़क हादसों में कमी आई है। साल 2017 के मुकाबले 2018 में सड़क हादसों का ग्राफ 17 प्रतिशत और हादसों में मौत का ग्राफ 24 प्रतिशत गिरा है। 2017 में 1764 हादसे हुए। इन हादसों में 399 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1535 लोग घायल हो गए। इन आंकड़ों को देखकर यातायात पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है।





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