पाली . सदर थाना पुलिस गत सोमवार को खैरवा रोड पर मामावास तिराहे के निकट लोडिंग जीप से ३४८ किलो डोडा-पोस्त पकडऩे के मामले में मुकदमा कमजोर करने का प्रयास कर रही है। खबर है कि कार्रवाई के दिन मुख्य सप्लायर रोहट के माण्डावास निवासी सोहनलाल पुत्र कालूराम विश्नोई इस जीप की रैकी कर रहा था, वह मौके से ही फरार हुआ, लेकिन पुलिस ने इस बात को रिपोर्ट में नहीं लिखा। फिलहाल उसका सुराग नहीं लगा है। पुलिस की यह करतूत डोडा सप्लायर को बचा भी सकती है।
माल भरवाया, साथ रवाना हुआ, फिर भागा
पत्रिका सूत्रों की माने तो कार्रवाई के दिन एक जीप को रुकवाकर पुलिस ने तलाशी ली। जीप के ऊपर सीमेंट के कट्टे भरे हुए थे। तलाशी लेने पर जीप के नीचे डोडा-पोस्त से भरे कट्टे मिले। जीप चालक समदड़ी जिला बाड़मेर के खेजडि़याली निवासी सताराम पुत्र लाबूराम भील को गिरफ्तार किया। जीप में दो फर्जी नम्बर प्लेट भी मिली। यह खेप मध्यप्रदेश के निकट नीमच से मुख्य आरोपी सोहनलाल विश्नोई ने ही भरवाई थी। साथ ही यह खेप सोहनलाल के यहां खाली होनी थी। डोडे की खेप भरवाकर इस जीप के आगे सोहनलाल अन्य गाड़ी से रैकी कर रहा था। जब यह माल पकड़ा गया तो वह भाग गया। पुलिस ने इस प्रकरण की जो एफआईआर दर्ज की, इसमें यह नहीं लिखा कि वह रैकी कर रहा था। पुलिस ने इतना ही लिखा कि यह माल सोहनलाल का है और कॉल डिटेल से उसकी भूमिका का पता किया जा रहा है। पुलिस द्वारा इस मुख्य तथ्य को छुपाना एफआइआर को कमजोर कर सकती है। अब यह पूरी जांच पकड़े गए आरोपी की कॉल डिटेल पर टिक गई है।
कल पेश करेंगे चालक को
इधर, मामले में रिमाण्ड पर चल रहे जीप चालक सताराम को लेकर पुलिस मध्यप्रदेश गई। मौके की तस्दीक की गई, जहां से यह खेप भरवाकर रवाना की गई। पुलिस अब सोहनलाल की तलाश कर रही है। आरोपी चालक सताराम को सोमवार को पुन: न्यायालय में पेश किया जाएगा।
जांच उसी थानाधिकारी को, जिस थाने में मामला दर्ज
एनडीपीएस की यह कार्रवाई प्रोबेशनर आरपीएस कल्पना सोलंकी ने की। मामले की जांच सदर थानाधिकारी सुरेश चौधरी को सौंपी गई। एनडीपीएस मामलों में जो अधिकारी कार्रवाई करता है, उसे जांच नहीं दी जाती है। चौकान्ने वाली बात यह है कि यह जांच उसी थानाधिकारी को सौंपी, जिस थाने में एफआइआर दर्ज की गई।
इसलिए होती है पुलिस अधिकारियों की स्पेशल ट्रेनिंग
एनडीपीएस मामलों में कई बार कमजोर एफआईआर के कारण आरोपी न्यायालय से रिहा हो जाता है। इसके चलते पुलिस मुख्यालय से पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। इस प्रशिक्षण में निरीक्षक-उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को एेसे गुर सिखाए जाते है, जिससे आरोपी न्यायालय में रिहा नहीं हो सके और मजबूत एफआईआर दर्ज हो। लेकिन अब भी पुलिस कई बार एेसी भूल कर जाती है, जिससे आरोपी को बच निकलने का मौका मिल जाता है।





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