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जैनाचार्य का नगर प्रवेश, कार्यों का लिया जायजा

सियाणा. जैनाचार्य नित्यसेन सुरीश्वर महाराज ने शिष्यों के साथ सियाणा में नगर प्रवेश किया। नगर प्रवेश मुख्य बस स्टेण्ड से होकर ग्राम पंचायत मार्ग से होते हुए भट्टों का चौक पहुंचे। जहां जैन समाज की महिलाओं ने सौमेया कर स्वागत रस्म अदा की। दीपक हठीला व सुरेश जैन ने बताया कि कस्बे में 2 फरवरी से 11 फरवरी तक केसरिया नाथ राजेन्द्रसूरी अंजन शलाका प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर महाराज नेतैयारी की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि महोत्सव में हर किसी को स्वयं का काम समझ कर महोत्सव को सफल बनाना है।प्रतिष्ठा निमित बन रहे पाण्डाल व अन्य कामों का जायजा लिया। उधर, प्रदीपसिंह चौहान की अध्यक्षता में ओसवाल जैन धर्मशाला में ग्रामीणों की बैठक हुई। इसमें जैन संघ ने प्रतिष्ठा के सफल आयोजन को लेकर सहयोग मांगा। जिस ग्रामवासियों ने पूर्ण सहयोग देने की बात कही। जालमसिंह चौहान, जैन संघ के दिनेशकुमार पोरवाल, जयंतीलाल गांधी, मनोहर गांधी, भंवर पालरेचा, कैलाश कोठारी, रायचंद संघवी समेत कई जने मौजूद रहे।
सायला में जिनेंद्र भक्ति महोत्सव का आगाज
सायला. शहर में शाह मोडमल जोइताराम बाफणा के विविध तप अनुमोदनार्थ उपधान सह जीवित श्री जिनेन्द्र भक्ति पंचाह्निका महोत्सव के तहत रविवार को गुरु भगवन्तों का नगर प्रवेश हुआ।
नगर प्रवेश पर कात्यायनी माता मंदिर के पास आयोजक बाफणा परिवार द्वारा विजय जयंतसेन सूरीश्वर महाराज के पट्टधर विजय जयरत्न सूरीश्वर महाराज का गाजे बाजे के सामैया किया किया। इसके बाद वरघोड़े के रूप में आम चौहटे पर स्थित श्रीपाश्र्वनाथ जैन व श्री कुंथुनाथ जैन मंदिर में साधु भगवन्तों ने दर्शन किए। दोपहर 2 बजे श्रीसुपाश्र्वनाथ जिनालय में श्रीशंतिनाथ पंच कल्याणक पूजा का आयोजन किया। इस अवसर पर सायला सरपंच सुरेश राजपुरोहित, मोडमल बाफना, भवरलाल, मांगीलाल, जयंतीलाल बाफना, अशोक कुमार, महावीर कुमार, प्रकाश कुमार, हितेश कुमार, पारसमल सोलंकी, गौतम चन्द, रमेश सोलंकी सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।
इंदियों को जीतने वाले जितेंद्रिय
विजय जयरत्न सूरीश्वर ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार वही व्यक्ति मनुष्य कहलाने के योग्य है। जो सार ग्रहण करें। जिसने इंद्रियों को जीत लिया वह जितेन्द्रिय है, वही जैन है। जो व्यक्ति जैन है उसे जैनमत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य महावीर के मार्ग का अनुसरण करता है। वह मोक्ष को प्राप्त करता है। जिसे त्याग पसंद है वह ज्ञान, चरित्र, वैराग व निवृति से मोक्ष के मार्ग पर जाएगा। वही कार्यक्रम में जैन संगीत कलाकार विनीत गेमावत ने गुरु आराधना के भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान आनंद विजय महाराज, अशोक विजय महाराज, जिनविजय महाराज, साध्वी सूर्यकिरणा श्रीजी आदि मौजूद थे।



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